अमेरिका के नौसेना नाकेबंदी के बाद भी ईरान का दावा, देश में खाने-पीने की चीजें पूरी तरह सुरक्षित हैं.

Nura Basta30 August 20263 min read20 viewsWorld
अमेरिका के नौसेना नाकेबंदी के बाद भी ईरान का दावा, देश में खाने-पीने की चीजें पूरी तरह सुरक्षित हैं.

अमेरिका की तरफ से लगाई गई कड़ी नौसेना नाकेबंदी और तमाम पाबंदियों के बीच ईरान के कृषि मंत्री Gholamreza Nouri ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने 30 अगस्त 2026 को साफ तौर पर कहा कि देश में खाने-पीने की जरूरी चीजों की कोई कमी नहीं है और खाद्य सुरक्षा पूरी तरह सुरक्षित है। तसनीम न्यूज एजेंसी और अल जजीरा अंग्रेजी की रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंत्री ने यह भी बताया कि तमाम लॉजिस्टिक दिक्कतों के बाद भी रणनीतिक भंडार लगातार बढ़ रहा है और आपातकालीन रिजर्व को छूने की कोई नौबत नहीं आई है।

निजी सेक्टर के पास है एक मिलियन टन से ज्यादा सामान

कृषि मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि बाहरी दुनिया की कोई भी रोक-टोक या प्रतिबंध देश की खाद्य सुरक्षा को खतरे में नहीं डाल सकते हैं। उन्होंने जानकारी दी कि इस समय देश के निजी सेक्टर के पास जरूरी सामान का एक मिलियन टन से ज्यादा का स्टॉक मौजूद है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि ईरान ने इतिहास में पहली बार चिकन मीट के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है और जल्द ही इसे दूसरे देशों को भेजने की योजना पर भी काम शुरू किया जाएगा।

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घरेलू कृषि उत्पादन में हुई बढ़ोतरी

कृषि मंत्री के इन दावों का समर्थन करते हुए खेती मामलों के उप कृषि मंत्री Majid Anjafi ने भी 30 अगस्त को आंकड़े सामने रखे। उन्होंने बताया कि सूखे की मार, पानी की भारी कमी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों जैसी बड़ी बाधाओं के बावजूद देश का घरेलू कृषि उत्पादन लगभग 130 मिलियन टन से बढ़कर 137 million tons तक पहुंच गया है। सरकार का यह मानना है कि देश के किसानों और स्थानीय स्तर पर हुई पैदावार ने इस मुश्किल समय में बहुत बड़ा सहारा दिया है।

राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने स्वीकार की थीं आर्थिक चुनौतियां

इन बयानों से ठीक एक दिन पहले यानी 29 अगस्त 2026 को ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने खुलकर यह बात मानी थी कि अमेरिकी प्रतिबंधों और खास तौर पर नौसेना की नाकेबंदी की वजह से देश के कुल आयात और निर्यात में 25 से 35 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आई है। राष्ट्रपति ने मौजूदा आर्थिक हालात को एक तरह का युद्ध करार दिया था और देशवासियों से युद्ध जैसे हालात के हिसाब से ही काम करने की अपील की थी। यह तनाव तब और ज्यादा बढ़ गया जब अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने 24 अगस्त को 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' नाम से पाबंदियों के एक नए दौर का ऐलान किया था।

वैश्विक स्तर पर बढ़ रही है चिंता

दूसरी तरफ पूरी दुनिया में इस संघर्ष को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन यानी FAO ने पिछले महीने यानी 5 अगस्त को चेतावनी जारी की थी कि ईरान के आसपास चल रहे इस टकराव के साथ-साथ यूक्रेन का युद्ध और अल नीनो का असर दुनिया भर में खाने-पीने की चीजों की महंगाई को बढ़ा सकता है। FAO ने यह भी साफ किया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही रुकने से कृषि सामानों के इनपुट पर बुरा असर पड़ा है, जबकि कच्चे तेल और खाद के दाम बढ़ने से ग्लोबल ट्रांसपोर्टेशन का खर्च भी लगातार बढ़ता जा रहा है।

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