Iran Rial Collapse: ईरान की मुद्रा रियाल में ऐतिहासिक गिरावट, अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद डॉलर के मुकाबले हुआ बेहाल.

ईरान की अर्थव्यवस्था पर इस समय बहुत बड़ा संकट आ गया है और वहां की मुद्रा रियाल में भारी गिरावट दर्ज की गई है। 26 अगस्त 2026 को खुले बाजार में ईरानी रियाल गिरकर 20 लाख रियाल प्रति अमेरिकी डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है। इस समय बाजार से मिल रही लाइव जानकारी के मुताबिक डॉलर के मुकाबले भाव 2,014,000 रियाल तक पहुंच चुका है। वहीं दूसरी तरफ पैसे भेजने का यानी रेमिटेंस रेट भी 2,011,000 रियाल पर पहुंच चुका है। मुद्रा के इस तरह अचानक धड़ाम होने के पीछे अमेरिका द्वारा उठाए गए कड़े कदम हैं।
अमेरिका का अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक प्रहार
अमेरिका ने 19 अगस्त 2026 को 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' लागू किया था और इसके बाद 24 अगस्त 2026 को अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने और भी कई नए नियमों का ऐलान किया। इन नए उपायों में डिजिटल एसेट्स, तकनीक, सोना, विमानन और शिपिंग सेक्टर को मुख्य रूप से निशाना बनाया गया है। अमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने इस कदम को एक तरह का 'आर्थिक डी-डे' बताया है। उनका कहना है कि किसी भी विरोधी देश के खिलाफ यह अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय हमला है। इसका मुख्य मकसद बैंक मेल्ली की डॉलर तक पहुंच को रोकना है।
ईरान के केंद्रीय बैंक का बड़ा कदम
इस मुश्किल हालात से निपटने के लिए ईरान के केंद्रीय बैंक यानी CBI ने 25 अगस्त 2026 को बाजार में स्थिरता लाने के वास्ते 50 करोड़ डॉलर यानी $500 million विदेशी मुद्रा जारी करने की घोषणा की। केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दोलनासर हेम्मती ने रियाल में आई इस गिरावट को कुछ समय के लिए बताया और इसे राजनीतिक प्रचार करार दिया। हालांकि उन्होंने इस बात को माना कि देश में तेल के निर्यात पर रोक और नौसेना की नाकेबंदी जैसी गंभीर परेशानियां बनी हुई हैं।
आम जनता की जेब पर भारी असर
इस आर्थिक संकट का सीधा असर ईरान के आम लोगों पर पड़ रहा है। इस साल 28 फरवरी 2026 को इजराइल के साथ शुरू हुए संघर्ष के बाद से आम लोगों की खरीदने की ताकत आधी रह गई है। जरूरी चीजों के दाम बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं। हालात यह हैं कि इंसुलिन की कीमत में 642%, बच्चों के दूध यानी बेबी फार्मूला में 95%, चिकन में 74% और खाने के तेल में 177% की भयानक बढ़ोतरी हुई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF ने साल 2026 के लिए 68.9% सालाना महंगाई दर और ईरान की जीडीपी में 5.4% की गिरावट का अनुमान लगाया है। इसके अलावा गर्मी और बिजली की कमी के कारण देश के दो बड़े पेट्रोकेमिकल प्लांटों को भी अपना काम बंद करना पड़ा है।
नेतृत्व का रुख और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
मुश्किल वक्त के बावजूद ईरान का नेतृत्व पूरी तरह से सख्त रुख अपनाए हुए है। देश के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा है कि उनका देश इस दबाव के सामने मजबूती से खड़ा रहेगा। वहीं संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर गालिबफ ने कहा कि देश का बचना इस आर्थिक गिरावट को पलटने पर निर्भर करता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघई ने इसके गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। दूसरी तरफ चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने वैश्विक वित्तीय व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए अमेरिकी तरीके की आलोचना की है। अमेरिका के इन प्रतिबंधों के दायरे में ईरान से जुड़े कई लोग और जहाज भी आ गए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय कारोबारियों पर भी खतरा मंडरा रहा है। इन तनावों के बीच यूएई यानी UAE के साथ व्यापार को फिलहाल रोक दिया गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य का इलाका भी अभी विवादों में है और ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक प्रतिबंध नहीं हटते, संपत्ति वापस नहीं मिलती और नाकेबंदी खत्म नहीं होती, तब तक इस रास्ते को नहीं खोला जाएगा। इस रास्ते को लेकर ओमान के साथ लगातार बातचीत चल रही है।