रुबियो के प्राचीन फ़ारस वाले बयान पर ईरान में भारी आक्रोश

एथेंस: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के एक भाषण ने ईरान में नई सियासी गरमी पैदा कर दी है। 7 अक्टूबर 2026 को एथेंस में दिए गए इस भाषण में रुबियो ने प्राचीन यूनान और फ़ारस के बीच हुए टकरावों का ज़िक्र करते हुए उन्हें आज के अमेरिका और तेहरान के बीच तनाव से जोड़ा। ईरान के अलग-अलग राजनीतिक धड़ों के नेताओं ने इस पर कड़ी नाराज़गी जताई और 10 अक्टूबर 2026 तक यह विरोध औपचारिक रूप से सामने आ चुका था।
ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख एब्राहिम अज़ीज़ी ने इस भाषण को पाखंड करार दिया। उनका कहना था कि जिस अमेरिका का इतिहास उपनिवेशवादी खून-खराबे और मूल निवासियों के नरसंहार से भरा हो, उसे अख़ामनी वंश की आलोचना करने का कोई नैतिक हक़ नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि अख़ामनी शासन ने दुनिया में मानवाधिकारों की पहली घोषणा की थी। अज़ीज़ी ने यह भी कहा कि अमेरिका के मन में ईरानी जनता के लिए बुनियादी दुश्मनी है।
सर्वोच्च नेता के वरिष्ठ सलाहकार अली अकबर वेलायती ने रुबियो के भाषण को अंतर्विरोधों से भरा बताया। उनके मुताबिक़ अमेरिका एक मज़बूत और स्वतंत्र ईरानी सभ्यता को पसंद नहीं करता। उन्होंने हिरोशिमा पर हुए बम हमलों और वियतनाम, इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में चले संघर्षों का हवाला देते हुए कहा कि जिस देश पर ऐसी घटनाओं की ज़िम्मेदारी हो, उसे दूसरों को नसीहत देने का अधिकार नहीं।
संसद अध्यक्ष की सख़्त चेतावनी
सबसे तीखी टिप्पणी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाक़िर क़ालीबाफ़ की रही। उन्होंने सिकंदर महान की विरासत का अनुसरण करने वालों को वेलेरियन जैसे अंजाम भुगतने की चेतावनी दी। उनके इशारे का मतलब साफ़ था कि आख़िरकार अमेरिका को पीछे हटना पड़ेगा। क़ालीबाफ़ ने कहा कि इतिहास गवाह है, प्राचीन सभ्यताओं को मिटाने की कोशिश करने वाले आक्रमणकारी आग लेकर आए, लेकिन शर्मिंदा होकर लौटे।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने भी रुबियो पर इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, प्राचीन यूनान से लेकर आधुनिक अमेरिका तक एक ज़बरदस्ती गढ़ी गई लगातार कहानी बनाने की कोशिश की गई। बक़ाई ने इस तरीक़े को कालभ्रम बताया और कहा कि इसका मक़सद अमेरिकी युद्धोन्मादी नीतियों को सही ठहराना है।
इस पूरे विवाद से साफ़ है कि अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाज़ी अब इतिहास और सभ्यता के मैदान तक पहुँच गई है। रुबियो के भाषण पर अमेरिकी पक्ष की तरफ़ से इन आरोपों का क्या जवाब आता है, यह देखना बाक़ी है।