होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का दावा: अमेरिकी जवाब अपर्याप्त, कुछ शर्तें मानी गईं

तेहरान: होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच खींचतान एक नए मोड़ पर पहुँच गई है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेजाई ने सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को एक्स पर लिखा कि अमेरिका ने ईरान की सात शर्तों में से कुछ पर सहमति जताई है। लेकिन उन्होंने वॉशिंगटन के कुल जवाब को "अपर्याप्त" करार दिया।
रेजाई ने साफ़ कहा कि ईरान की कूटनीति अब बदल चुकी है और देश पुरानी स्थिति पर लौटने वाला नहीं है। उनके इस बयान से साफ़ है कि होर्मुज का मसला फ़िलहाल सुलझने से ज़्यादा उलझता दिख रहा है।
रविवार को क्या कहा गया था
इससे एक दिन पहले, रविवार 11 अक्टूबर को, रेजाई ने कहा था कि ईरान अब अमेरिका के सवालों का सक्रिय जवाब नहीं दे रहा है। जब तक सातों शर्तें पूरी तरह न मानी जाएँ, तब तक ईरान न जलमार्ग खोलेगा और न आगे की बातचीत करेगा।
ये सात शर्तें संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान सामने रखी गई थीं। इनमें अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करने, ईरान की तेल बिक्री पर लगी पाबंदियाँ हटाने और सभी मोर्चों पर शत्रुता रोकने की माँग शामिल है। ईरान का कहना है कि ये माँगें जून में हुए 14 बिंदुओं वाले समझौता ज्ञापन पर आधारित हैं।
ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़िर ग़ालिबाफ़ और संसदीय समिति के प्रवक्ता हसन गशगवी ने अक्टूबर में ही दोहराया था कि ये शर्तें पूरी होने तक जलडमरूमध्य बंद रहेगा। उप विदेश मंत्री काज़िम ग़रीबाबादी ने इसे ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा की "लाल रेखा" बताया। उनके मुताबिक़ जब तक अमेरिका यह न माने कि सैन्य समाधान संभव नहीं है, तब तक मौजूदा कदम जारी रहेंगे।
समुद्र में तनाव भी बढ़ा है। रविवार को एक तेल टैंकर के नौसैनिक माइन से टकराने की ख़बर आई। इसी बीच यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने ओमान के पास एक टैंकर पर अलग ड्रोन हमले की जानकारी दी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 10 अक्टूबर को