अमेरिका को ईरान की खुली धमकी, समुद्री नाकाबंदी जारी रही तो अमेरिकी हितों को बनाएंगे निशाना.

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर से बहुत ज्यादा बढ़ गया है और इस बार मामला अमेरिका और ईरान के बीच सीधा टकराव का बनता दिख रहा है। 27 अगस्त 2026 को ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रेजाई ने अमेरिका को साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि समुद्री नाकाबंदी यूं ही जारी रही तो अमेरिका के आर्थिक हितों पर पूरी ताकत के साथ हमला किया जाएगा। इस बड़े बयान के बाद से पूरी दुनिया में खलबली मच गई है और इसका असर गल्फ देशों में रहने वाले लोगों और काम करने वाले प्रवासियों पर भी साफ तौर पर देखने को मिल रहा है।
ईरान का दावा और अमेरिका की कड़ी कार्रवाई
ईरान के अधिकारी मोहसेन रेजाई का कहना है कि उनके देश ने संघर्ष विराम के दौरान समुद्री नाकाबंदी को सफलतापूर्वक तोड़ दिया था। उन्होंने दावा किया कि ईरान ने 70 मिलियन से 80 मिलियन बैरल तेल का निर्यात किया और नए रास्ते बनाकर अपने तेल की बिक्री को पुराने प्रतिबंधों से पहले के स्तर पर पहुंचा दिया है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि बेरूत और उसके दक्षिणी इलाके उनके लिए लाल रेखा हैं और उन्हें पूरा भरोसा है कि इजरायल को लेबनान के कब्ज़े वाले इलाकों से पीछे हटना ही पड़ेगा।
दूसरी तरफ अमेरिका इस बात से बिल्कुल इनकार कर रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz पूरी तरह से खुला हुआ है और इस पर अमेरिका का नियंत्रण है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने भी जानकारी दी कि 14 जुलाई को नाकाबंदी फिर से लागू होने के बाद से अमेरिकी बलों ने अब तक 75 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदला है, 3 जहाजों को बेकार किया है और 2 जहाजों पर बोर्डिंग की है। हालांकि CENTCOM के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिंस ने यह भी माना कि मानवीय सहायता ले जाने वाले 40 से ज्यादा जहाजों को 24 अगस्त तक निकलने की अनुमति दी गई थी.
अमेरिका का आर्थिक प्रहार और कड़े प्रतिबंध
एक तरफ जहां समंदर में सेना तैनात है तो वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने 27 अगस्त को Operation Economic Outcast की शुरुआत कर दी है। इसके तहत लगभग 60 लोगों, कंपनियों और जहाजों पर नए प्रतिबंध लगा दिए गए हैं। अमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने चेतावनी दी है कि जो भी विदेशी देश या कंपनी ईरान को पैसा कमाने में मदद करेगी, उसे अमेरिकी डॉलर आधारित वित्तीय प्रणाली से बाहर कर दिया जाएगा। इन नए प्रतिबंधों के दायरे में डिजिटल संपत्ति, सोना, तकनीक, विमानन और शिपिंग सेक्टर को लाया गया है।
इस अमेरिकी आर्थिक दबाव का असर अब ईरान के घरेलू बाजार पर भी दिखने लगा है। ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद जाफर घाएम्पनाह ने खुद माना है कि नौसेना की इस नाकाबंदी की वजह से पेट्रोल का आयात रुक गया है, जिसके कारण देश के अंदर पेट्रोल की भारी कमी हो गई है और पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं।
शर्तें और कतर की मध्यस्थता की कोशिशें
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए कुल 6 शर्तें रखी हैं। इनमें अमेरिका द्वारा नौसेना की नाकाबंदी पूरी तरह से हटाने, ईरान और उसके साथियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई बंद करने और युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा देना शामिल है। इस तनाव को कम करने के लिए कतर के विदेश मंत्री ने तेहरान का दौरा भी किया है और ओमान के जरिए एक अस्थायी शिपिंग कॉरिडोर समझौते पर भी बात चल रही है। हालांकि यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि अमेरिका ईरान की इन मांगों को मानता है या नहीं। गल्फ क्षेत्र में रहने वाले प्रवासियों और भारत आने-जाने वाले लोगों के लिए यह स्थिति काफी चिंताजनक बनी हुई है क्योंकि किसी भी बड़े युद्ध या तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और तेल की कीमतों पर पड़ता है।