अमेरिका से बातचीत के लिए ईरान ने रखी सात शर्तें, तेल प्रतिबंध हटाने और संपत्ति लौटाने की मांग
ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत के लिए तेल प्रतिबंध हटाने और जमी हुई संपत्ति लौटाने जैसी सात शर्तें रखी हैं।

तेहरान: ईरान ने अमेरिका के साथ नए सिरे से बातचीत शुरू करने के लिए सात शर्तें रखी हैं। 27 अक्टूबर 2026 तक की स्थिति के अनुसार, ईरान का कहना है कि जब तक उसकी इन मांगों को पूरा नहीं किया जाता, वह बातचीत की मेज पर नहीं आएगा।
ईरान की इन मुख्य शर्तों में तेल प्रतिबंधों को हटाना और उसकी जमी हुई संपत्तियों को वापस करना शामिल है। साथ ही, ईरान ने मांग की है कि अमेरिकी नौसेना द्वारा उसके जहाजों की नाकेबंदी बंद की जाए और सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म हो, जिसमें इजरायल की दक्षिणी लेबनान से वापसी भी शामिल है।
ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रजाई ने साफ किया कि क्षेत्रीय सुरक्षा आंतरिक रूप से तय होनी चाहिए और इसमें अमेरिका पर निर्भरता नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी घोषणा की कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) अपनी पुरानी स्थिति में वापस नहीं लौटेगा।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाक़ाई ने बताया कि ईरान कूटनीति को प्राथमिकता देता है, लेकिन खतरों के खिलाफ कड़े कदम उठाने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि 27 अक्टूबर को हुए इजरायल के राष्ट्रीय चुनावों के नतीजों से ईरान की तैयारियों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। अली बघेरी कानी ने भी इन सात बिंदुओं को किसी भी संभावित संवाद का आधार बताया है।
दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ पिछले युद्धविराम को समय की बर्बादी बताते हुए संघर्ष शुरू करने के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने ईरान के रुख की आलोचना करते हुए कहा कि वह सब कुछ पहले ही मांग रहा है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के उन दावों को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि अमेरिकी नौसैनिक संपत्तियां होर्मुज जलडमरूमध्य से पीछे हट गई हैं।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने राष्ट्रपति ट्रंप से ईरान के खिलाफ संयुक्त हमला करने या इजरायल के स्वतंत्र ऑपरेशन का समर्थन करने का आग्रह किया है। नेतन्याहू का कहना है कि इजरायल को अपना काम पूरा करना है। हालांकि, सैन्य स्तर पर नेतन्याहू और आईडीएफ चीफ ऑफ स्टाफ एयाल ज़मीर के बीच सैन्य तनाव बढ़ाने को लेकर मतभेद की खबरें हैं।
क्षेत्रीय तनाव के बीच 26 अक्टूबर को मक्का पैक्ट देशों—सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान—के उच्च स्तरीय सुरक्षा प्रतिनिधिमंडल तेहरान में मिले। इसके अलावा, 27 अक्टूबर को मिस्र और ईरान के बीच द्विपक्षीय चर्चा हुई। ओमान के राजनयिक बद्र अलबुसैदी ने आठ खाड़ी देशों के बीच एक गैर-आक्रामक समझौते का प्रस्ताव दिया है, जबकि कतर ने ईरान से सद्भावना दिखाने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने का आग्रह किया है।
इसी बीच, हूती विद्रोहियों ने 27 अक्टूबर को सऊदी अरब की रास तनूरा रिफाइनरी पर मिसाइल हमले का दावा किया, जिसे सऊदी हवाई रक्षा प्रणालियों ने रोक लिया। वहीं, ईरान के पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी ने घोषणा की है कि वह 1 नवंबर से दक्षिण कोरियाई कंपनी सिनोकोर के जहाजों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करेगा।