अमेरिका के नौसेना नाकाबंदी के बाद ईरान ने कैस्पियन सागर के रास्ते तेल और जरूरी सामानों का किया आयात शुरू।

अमेरिका द्वारा ईरान के दक्षिणी बंदरगाहों पर लगातार नौसेना की नाकाबंदी जारी रखने के कारण तेहरान ने अब कैस्पियन सागर का रुख किया है। यह नाकाबंदी सबसे पहले 13 अप्रैल 2026 को शुरू हुई थी और इसे 14 जुलाई 2026 को फिर से लागू किया गया था। इस कड़े कदम के बाद ईरान अपने तेल निर्यात और जरूरी सामानों के आयात के लिए उत्तरी समुद्री रास्तों का इस्तेमाल करने पर मजबूर हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रूप ने ईरान के उस प्रस्ताव को साफ ठुकरा दिया था जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को सात दिनों के लिए फिर से खोलने की बात कही गई थी, जिसके बदले में नाकाबंदी और प्रतिबंधों को हटाने की मांग की गई थी। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने यह साफ कर दिया है कि यह नाकाबंदी तब तक जारी रहेगी जब तक इसकी जरूरत होगी।
कड़े प्रतिबंधों के बीच कूटनीतिक बातचीत और क्षेत्रीय तनाव
भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच मंगलवार, 24 सितंबर 2026 को अप्रत्यक्ष बातचीत हुई, जो जून में पिछले समझौते के टूटने के बाद पहली बार हुई थी। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस चर्चा को सकारात्मक बताया और आगे भी बातचीत जारी रखने का संकेत दिया। वहीं दूसरी ओर, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने 25 सितंबर 2026 को अपने यूक्रेनी समकक्ष एंड्री सिबीहा से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब क्षेत्रीय तनाव काफी बढ़ा हुआ था, जिसमें जुलाई के महीने में कैस्पियन सागर में एक ईरानी कमर्शियल जहाज पर यूक्रेनी हमला भी शामिल था।
उत्तरी ट्रांजिट रणनीति के सामने आ रही बड़ी लॉजिस्टिक चुनौतियां
ईरान की इस उत्तरी ट्रांजिट रणनीति के सामने अभी भी कई बड़ी और गंभीर लॉजिस्टिक परेशानियां बनी हुई हैं। ईरान के शिपिंग एसोसिएशन के महासचिव मसूद पोल्मेह ने जानकारी दी है कि पानी का स्तर लगातार गिरने की वजह से बंदरगाह की क्षमता 6,000 टन वाले जहाजों से घटकर केवल 4,000 टन वाले जहाजों तक ही सिमट गई है। ईरानी पर्यावरण विभाग के शहरम फ़दाकार ने इस बात की पुष्टि की है कि पिछले दो से तीन सालों में कैस्पियन सागर का जलस्तर हर साल 20 सेंटीमीटर से ज्यादा कम हो गया है। इसके बावजूद, पोर्ट्स एंड मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन के प्रमुख मोहम्मद शकीबी-नसब ने बताया कि अमेरिका और इसराइल के साथ संघर्ष शुरू होने के बाद से उत्तरी बंदरगाहों के जरिए जरूरी सामानों की ढुलाई का हिस्सा 18% से बढ़कर 30% हो गया है।
रूस के साथ रेलवे का विस्तार और सैन्य सहयोग
इन रास्तों को और मजबूत करने के लिए ईरान रूस के साथ जुड़ने वाली रश्ता-अस्तारा रेलवे परियोजना को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दे रहा है। इस बदलाव के तहत रूस से गेहूं, सूरजमुखी का तेल और पशुओं के चारे का आयात काफी बढ़ा दिया गया है। रिपोर्टों से यह भी पता चलता है कि कैस्पियन सागर का इस्तेमाल सैन्य ट्रांसफर के लिए भी किया जा रहा है, जिसमें रूसी ड्रोन के पुर्जे और विस्फोटक शामिल हैं। क्षेत्रीय सुरक्षा को औपचारिक रूप देने के लिए ईरान कैस्पियन सागर की कानूनी स्थिति पर 2018 के कन्वेंशन की पुष्टि करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य गैर-तटीय देशों की सशस्त्र सेनाओं को इस क्षेत्र से दूर रखना है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में मिसाइल हमला और देशों की सख्ती
तनाव उस समय और ज्यादा बढ़ गया जब 27 सितंबर 2026 को ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकरों पर कम से कम छह एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें दागीं। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने इस बात की पुष्टि की है कि ब्रिटेन, तुर्की, ओमान और यूएई सहित कई देश प्रतिबंधों को लागू करने में पूरा सहयोग कर रहे हैं, और इनमें से कुछ सहयोगियों ने ईरानी एयरलाइंस की उड़ानों के साथ-साथ बैंकिंग लेन-देन को भी पूरी तरह से निलंबित कर दिया है।