प्रतिबंधों और आर्थिक संकट के बीच ईरान में महंगे हुए स्मार्टफोन, हजारों लोगों के फोन से गया नेटवर्क सिग्नल

आर्थिक संकट और प्रतिबंधों के कारण ईरान में स्मार्टफोन खरीदना मुश्किल हुआ, साथ ही हजारों फोन नेटवर्क से कट गए हैं।

Gautam Sahu23 October 20262 min read0 viewsWorld
प्रतिबंधों और आर्थिक संकट के बीच ईरान में महंगे हुए स्मार्टफोन, हजारों लोगों के फोन से गया नेटवर्क सिग्नल

तेहरान: ईरान में अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रतिबंधों और गहरे आर्थिक संकट की वजह से आम नागरिकों के लिए स्मार्टफोन खरीदना बेहद मुश्किल हो गया है। बाजार में नए मॉडल तो पहुंच रहे हैं, लेकिन मुद्रा की अस्थिरता और आसमान छूती कीमतों ने इन्हें लोगों की पहुंच से दूर कर दिया है।

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने 23 अक्टूबर 2026 तक ईरानी तकनीकी क्षेत्रों में अमेरिकी निवेश को और सीमित करने के लिए नए नियमों का प्रस्ताव दिया है। ये प्रतिबंध अब देश के विमानन, डिजिटल संपत्ति, सोने, शिपिंग और टेक्नोलॉजी उद्योगों को निशाना बना रहे हैं।

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रजाई ने स्थिति की गंभीरता को स्वीकार किया है। उन्होंने बताया कि आर्थिक दबाव और संभावित नाकाबंदी के कारण परिवारों को बढ़ती कीमतों का बोझ उठाना पड़ेगा और निवेश करना और भी कठिन हो जाएगा।

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देश के मोबाइल बाजार में तकनीकी और प्रशासनिक संकट भी गहरा गया है। राज्य द्वारा नियंत्रित रजिस्ट्रेशन सिस्टम में गड़बड़ी की वजह से उन हजारों फोन का नेटवर्क कट रहा है, जिनमें गलत या उधार लिए गए IMEI पहचानकर्ताओं का इस्तेमाल किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक अब तक लगभग 10,000 फोन डिस्कनेक्ट हो चुके हैं।

यह समस्या भीषण महंगाई के बीच आई है, जहां सितंबर में उपभोक्ता कीमतें पिछले साल के मुकाबले 89.8 प्रतिशत तक बढ़ गईं। विदेशी मुद्रा प्रतिबंधों के कारण 400 यूरो से अधिक कीमत वाले हैंडसेट का व्यावसायिक आयात फिलहाल रुका हुआ है।

उपभोक्ताओं का भरोसा पहले ही कम हो चुका है, क्योंकि पिछले समय में कुरोश कंपनी घोटाले में 17,760 फोन डिलीवर नहीं किए गए थे।

इलेक्ट्रॉनिक्स की कीमतें वैश्विक स्तर पर भी बढ़ रही हैं। जनवरी 2026 में निर्माताओं ने बताया था कि मेमोरी चिप्स जैसे पुर्जों की लागत बढ़ने से साल भर में कीमतों में 5 से 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। अक्टूबर 2026 के अनुमानों के अनुसार, नोटबुक की कुल लागत में मेमोरी चिप्स का हिस्सा अब 30 प्रतिशत से अधिक हो जाएगा क्योंकि सप्लायर उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स के बजाय एआई और सर्वर एप्लिकेशन को प्राथमिकता दे रहे हैं।

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