अमेरिका को ईरान की खुली धमकी, संसद अध्यक्ष ने कहा अब नहीं मानेंगे अनुपात का नियम.

रविवार, 6 सितंबर 2026 को ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाग़र गालिबाफ ने एक बड़ा बयान देते हुए साफ कर दिया कि अमेरिका के सैन्य एक्शन का जवाब अब नपे-तुले तरीके से नहीं दिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान के सुरक्षा या हितों पर यदि आगे कोई भी हमला हुआ, तो उसका जवाब पहले से कहीं अधिक तेज, भारी और दर्दनाक होगा। इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और ज्यादा बढ़ गया है।
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के बाद बढ़ा तनाव
यह पूरा विवाद अमेरिका के हालिया सैन्य अभियानों के बाद शुरू हुआ है, जिसे Operation Epic Fury नाम दिया गया था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड CENTCOM ने यह जानकारी दी थी कि उन्होंने फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में ईरान के दो तेल टैंकरों M/T Downy और M/T Stark 1 को निष्क्रिय कर दिया और तीसरे टैंकर M/T Kylo को पूरी तरह तबाह कर दिया। अमेरिका का कहना था कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड IRGC ने अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर और गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया था, हालांकि इस हमले में किसी भी अमेरिकी सैनिक को चोट नहीं आई थी। अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने ईरान के तेल बेड़े को लाचार बताया और चेतावनी दी कि अगर अमेरिकी जहाजों को फिर से निशाना बनाया गया, तो ईरान के और भी टैंकर डुबो दिए जाएंगे।
ईरान का पलटवार और क्षेत्रीय देशों पर असर
ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी हमलों को युद्ध अपराध और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2 की धारा 4 का उल्लंघन बताया। ईरान के सैन्य कमांड ने भी साफ कह दिया है कि अगर ईरानी जहाजों की आवाजाही में रुकावट डाली गई, तो अमेरिकी युद्धपोतों पर हमले और ज्यादा तेज कर दिए जाएंगे। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि उसने 5 सितंबर 2026 को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अनाधिकृत रूट पर चल रहे तीन तेल टैंकरों और अमेरिका से जुड़े तीन अन्य जहाजों को निशाना बनाया था। इसके अलावा, ईरान ने यह भी आरोप लगाया कि दक्षिणी ईरान के सिरिक इलाके में हाल ही में हुए अमेरिकी हमले में एक बच्चे समेत पांच लोगों की मौत हो गई, जो एक शादी समारोह में शामिल थे। संसद की आर्थिक समिति के प्रवक्ता फतोल्लाह तवासोली ने कहा कि प्रतिबंधों के जरिए ईरान को कमजोरी की स्थिति में बातचीत करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है।
मध्य पूर्व में फैलता जा रहा है संघर्ष
बीती 1 सितंबर से यह संघर्ष और भी ज्यादा फैल चुका है। अमेरिकी हमलों में ईरान के एयर-डिफेंस सिस्टम, रडार और नौसेना ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इसके जवाब में ईरान ने कुवैत, बहरीन, जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात UAE में मौजूद सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं। इस बीच क्षेत्रीय तनाव अपनी चरम सीमा पर है क्योंकि लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इजरायली हमलों में चार लोगों की मौत की पुष्टि की है। इजरायल का कहना था कि ये हमले ईरान समर्थित हिजबुल्लाह द्वारा इजरायली सैनिकों पर किए गए ड्रोन हमलों के जवाब में किए गए थे। इजरायल के इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज के विशेषज्ञ डैनी सिट्रिनोविज ने बताया कि अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला करने की ईरान की यह जिद दिखाती है कि वह अब उन जोखिमों को उठाने के लिए भी तैयार है जिनसे वह पहले बचा करता था। Gulf देशों में रह रहे प्रवासियों और भारत से आने-जाने वाले लोगों के लिए भी यह स्थिति चिंता का विषय बनती जा रही है क्योंकि लगातार बढ़ते हमलों के कारण पूरे इलाके में सुरक्षा और एहतियात बढ़ा दी गई है।