होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान का बड़ा फैसला, भारत और चीन समेत चार देशों के जहाजों को मिली छूट
ईरान ने भारत, चीन, इराक और कतर के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य में पारगमन प्रतिबंधों से छूट दी है। जानें पूरी खबर।

तेहरान: ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में लागू पारगमन प्रतिबंधों में ढील देते हुए भारत, चीन, इराक और कतर के जहाजों को विशेष छूट दी है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के उपाध्यक्ष अमीर हयात-मोगादम ने 3 नवंबर, 2026 को इस फैसले की घोषणा की।
बता दें कि 28 फरवरी, 2026 को ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से इस जलमार्ग में शिपिंग पर व्यापक प्रतिबंध लागू किए गए थे। हयात-मोगादम के मुताबिक, इन चार देशों के जहाज अब स्वतंत्र रूप से गुजर सकेंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका ने इन विशिष्ट जहाजों को नहीं रोका है।
ईरानी सरकार ने इस कदम को आपसी हितों की रक्षा और आवश्यक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बनाए रखने के तौर पर पेश किया है। भारत को यह छूट विशेष रूप से दवाओं के आयात को आसान बनाने के लिए दी गई है, जबकि चीन के लिए इसका उद्देश्य राजनीतिक समर्थन हासिल करना और आर्थिक संबंधों को सुरक्षित रखना है। इराक और कतर को भी इस नीति में शामिल किया गया है, हालांकि उनके लिए रणनीतिक कारणों का स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है।
इन देशों के लिए पारगमन शुल्क (transit fees) के नियम अलग-अलग रखे गए हैं। भारत और चीन के जहाजों को तेहरान को पारगमन शुल्क देना होगा, जबकि कतर के जहाजों को बिना किसी शुल्क के मुफ्त रास्ता दिया गया है। इराक के जहाजों के शुल्क की स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।
इन छूटों के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य एक बेहद अस्थिर समुद्री क्षेत्र बना हुआ है। 6 नवंबर, 2026 तक की रिपोर्टों के अनुसार, व्यावसायिक शिपिंग को गंभीर खतरों का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें नौसैनिक सुरंगों (naval mines) के कारण लगी आग और अनाधिकृत रास्तों का उपयोग करने वाले जहाजों से जुड़ी घटनाएं शामिल हैं।
6 नवंबर से पहले के 24 घंटों में कई तेल टैंकरों और एक टगबोट में आग लग गई, जिनके बारे में कहा गया कि उन्होंने समुद्री चेतावनियों को नजरअंदाज किया था। ईरानी सैन्य बल जलमार्ग पर नियंत्रण बनाए हुए हैं और अमेरिका पर आरोप लगा रहे हैं कि वह जहाजों को प्रतिबंधित और सुरंगों वाले शिपिंग लेन का उल्लंघन करने के लिए उकसा रहा है। अमेरिका ने पूरे साल ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी कर रखी है।