होर्मुज़ जलडमरूमध्य: अमेरिकी जवाब को ईरान ने बताया नाकाफी

तेहरान: ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेज़ाई ने सोमवार को कहा कि अमेरिका ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए ईरान की सात शर्तों में से कुछ मान ली हैं। लेकिन उन्होंने वाशिंगटन के कुल जवाब को "नाकाफी" करार दिया। यानी दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के बजाय एक नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है।
रेज़ाई के मुताबिक़ अमेरिकी जवाब में कुछ बातें अब भी धुंधली हैं। इसी वजह से ईरान ने अपनी मौजूदा जवाबी प्रक्रिया रोक दी है और वाशिंगटन से स्पष्टीकरण की मांग की है। उन्होंने साफ किया कि जब तक अमेरिका पूरी तरह शर्तें नहीं मानता, तब तक जलडमरूमध्य बंद रहेगा और कोई बातचीत नहीं होगी।
ईरान ने इसके लिए चार से पांच दिन की समय-सीमा तय की है। इस दौरान न तो रास्ता खुलेगा और न ही किसी तरह की वार्ता होगी।
क्या हैं ईरान की सात शर्तें
ये शर्तें जून में हुए "इस्लामाबाद मेमोरेंडम" से जुड़ी बताई जा रही हैं। इनमें सैन्य कार्रवाई पूरी तरह बंद करना, ईरान की जब्त विदेशी संपत्ति को जारी करना, तेल निर्यात पर लगी पाबंदियां हटाना और ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करना शामिल है।
इस पूरे विवाद की जड़ फरवरी 28 को शुरू हुआ संघर्ष है, जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमले किए थे। इसके बाद 8 अप्रैल को युद्धविराम हुआ, लेकिन हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पहले सात दिनों में जलडमरूमध्य खोलने का संकेत दिया था। वहीं संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबाफ ने अक्टूबर के शुरुआती दिनों में दोहराया कि पूरी शर्तों का पालन ज़रूरी है। यानी तेहरान के भीतर भी इस मुद्दे पर सुर एक जैसा नहीं दिखा।
दूसरी ओर अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने 8 अक्टूबर को कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुला है और चालू हालत में है। उसने अपने दावे के समर्थन में वह आंकड़े भी पेश किए, जिन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साझा किया था।
रेज़ाई ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि ईरान की कूटनीति अब यथास्थिति से हट चुकी है। उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर अमेरिका ने और "आक्रामकता