होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की कड़ी चेतावनी, अवैध रास्तों का इस्तेमाल करने पर जहाजों पर लगेगा भारी जुर्माना

ईरान के आधिकारिक स्रोतों ने होरमुज जलडमरूमध्य में अवैध रास्तों के इस्तेमाल को लेकर एक औपचारिक चेतावनी जारी की है। इस अहम घोषणा को सबसे पहले ओमान ऑब्जर्वर ने 27 सितंबर 2026 को प्रकाशित किया था। इस चेतावनी के जरिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण इस जलमार्ग में समुद्री सुरक्षा नियमों को और ज्यादा कड़ा कर दिया गया है और तय किए गए रास्तों पर ही चलने की बात कही गई है। ईरानी अधिकारियों ने साफ किया है कि इन रास्तों पर बिना अनुमति के चलना पूरी तरह से गैरकानूनी है और जो जहाज नियमों को तोड़ेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मौजूदा समय में इस इलाके में लगातार भू-राजनीतिक तनाव बना हुआ है, ऐसे में यह नया निर्देश अंतरराष्ट्रीय समुद्री ऑपरेटरों के लिए एक साफ संदेश है कि नियमों का पालन करना कितना जरूरी है। ईरान इस क्षेत्र में नेविगेशन के रास्तों पर अपना पूरा नियंत्रण रखना चाहता है और उसने चेतावनी दी है कि तयशुदा कानूनी रास्तों से हटने वाले जहाजों पर कड़ा जुर्माना और कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।
नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई और लगेगा भारी जुर्माना
फारस की खाड़ी जलमार्ग प्रबंधन प्राधिकरण यानी PGSA ने यह साफ कर दिया है कि जो भी जहाज बिना अनुमति वाले रास्तों का इस्तेमाल करेंगे, उन्हें गंभीर प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा। इसके अलावा जहाज के मालिक, मास्टर और क्रू मेंबर को वित्तीय और मानसिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। इस तरह की लापरवाही करने वाले जहाजों को भविष्य में होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति देने में भारी मुश्किलें आएंगी।
जो चार्टरर जहाजों को अवैध रास्तों से गुजरने के लिए मजबूर करेंगे, उनकी कंपनियों को एक नॉन-कम्प्लायंस लिस्ट यानी NCL में डाल दिया जाएगा। इसके बाद उन कंपनियों से जुड़े सभी जहाजों पर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने पर रोक लगा दी जाएगी। ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति आयोग ने 24 सितंबर 2026 से 'होरमुज जलमार्ग की सुरक्षा और विकास सुनिश्चित करने के लिए रणनीतिक कार्रवाई' बिल के अनुच्छेद 13, 14 और 15 को पास कर दिया है। इसके तहत नियम तोड़ने पर जहाज के कुल कार्गो का 20 प्रतिशत हिस्सा या उसके बराबर की राशि जब्त करने का प्रावधान है। साथ ही जुर्माना भरने तक जहाज को हिरासत में रखा जाएगा और इन मामलों की सुनवाई के लिए अंतरराष्ट्रीय और समुद्री कानून के जानकारों वाले विशेष न्यायालय बनाए जाएंगे।
अमेरिका के साथ बातचीत और ईरान की शर्तें
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकछी ने 25 सितंबर 2026 को घोषणा की थी कि ईरान ने कतर के जरिए अमेरिका को एक सात-दिवसीय योजना भेजी थी ताकि इस जलमार्ग में सामान्य जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो सके। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 26 सितंबर को इस प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे अस्वीकार्य बता दिया था। इसके बाद 27 सितंबर 2026 को विदेश मंत्री अब्बास अराकछी ने फिर से दोहराया कि ईरान जलमार्ग को दोबारा खोलने के लिए अपनी शर्तों पर पूरी तरह कायम है। इन शर्तों में अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को हटाना, ईरानी तेल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों को खत्म करना और युद्धविराम लागू करना शामिल है।
दूसरी ओर, ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल्बुसैदी ने 27 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए होर्मुज जलमार्ग में नेविगेशन को सुरक्षित रखने का वादा किया। उन्होंने ईरान और अमेरिका से अपील की कि वे अपने विवादों को हमेशा के लिए बातचीत के जरिए सुलझा लें। अंतरराष्ट्रीय कानून के मोर्चे पर, ईरान ने संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि यानी UNCLOS पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, फिर भी उसका मानना है कि इस जलमार्ग में शांतिपूर्ण आवाजाही का नियम लागू होता है। हालांकि, दुनिया भर का रुख यह है कि ट्रांजिट पास का नियम लागू होना चाहिए ताकि सभी जहाजों और विमानों को बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ने की आजादी मिल सके।