ईरान के संसद अध्यक्ष का बड़ा बयान, अमरीका के वादों पूरे होने तक बंद रहेगा होर्मुज जलडमरूमध्य

Aanya20 September 20262 min read0 viewsWorld
ईरान के संसद अध्यक्ष का बड़ा बयान, अमरीका के वादों पूरे होने तक बंद रहेगा होर्मुज जलडमरूमध्य

ईरान के संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने हाल ही में एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि देश को इस समय अमरीका के साथ संघर्ष के बीच एक साथ लड़ना और बातचीत करनी होगी। उन्होंने संसद को संबोधित करते हुए साफ कर दिया है कि जब तक अमरीका जून महीने में हुए शांति समझौते के तहत अपने वादों को पूरा नहीं करता, तब तक रणनीतिक रूप से बेहद अहम Strait of Hormuz को नहीं खोला जाएगा।

जून के शांति समझौते पर विवाद

अध्यक्ष गालिबफ के अनुसार, ईरान की खास शर्तों के पूरा होने और उसके अधिकारों को मान्यता मिलने तक इस जलमार्ग को फिर से शुरू करने और बातचीत की मेज पर लौटने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि ईरान की इन मांगों और शर्तों के बारे में बिचौलियों के जरिए अमरीका को पहले ही जानकारी दी जा चुकी है। ईरान अपनी सैन्य ताकत का इस्तेमाल कूटनीतिक दबाव को बढ़ाने के लिए करना चाहता है। गौर करने वाली बात यह है कि यह शांति समझौता यानी मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग 17 जून 2026 के आसपास अमरीकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian के बीच हुआ था। इस समझौते को कराने में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और गृह मंत्री Mohsin Naqvi ने मुख्य भूमिका निभाई थी, जिसमें कतर का भी सहयोग हो सकता है। इस समझौते का मकसद दुश्मनी को रोकना, अमरीकी सैन्य मौजूदगी को कम करना, प्रतिबंधों से राहत देना और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना था। लेकिन दोनों पक्षों की तरफ से शर्तों को अलग-अलग तरीके से समझने के कारण यह समझौता टूट गया।

शिपिंग और समुद्री व्यापार पर असर

आपको बता दें कि अमरीका और इजराइल द्वारा सैन्य अभियान शुरू किए जाने के बाद से 28 फरवरी 2026 से ही ईरान ने होर्मुज जलमार्ग की नाकाबंदी कर रखी है। हालांकि अमरीकी नौसेना का यह दावा है कि जलमार्ग खुला हुआ है, लेकिन समुद्री शिपिंग का डेटा कुछ और ही कहानी बयां करता है, जिससे साफ पता चलता है कि समुद्री ट्रैफिक में भारी गिरावट आई है। गत 19 सितंबर 2026 को ईरान के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता Ali Zainvand ने भी अमरीका से जून के समझौते का पालन करने की मांग की थी। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी इस सैन्य तनाव और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर मंडराते खतरे को लेकर गहरी चिंता जताई है। इस पूरे घटनाक्रम का असर उन लोगों पर भी पड़ रहा है जो खाड़ी देशों में रहते हैं या वहां की यात्रा करते हैं, क्योंकि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से हर कोई सुरक्षा को लेकर चिंतित है।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin
Share:

Comments

Leave a comment