Strait of Hormuz: ईरान ने अमेरिका के सामने रखी बड़ी शर्त, कहा जब तक ना हटे आर्थिक नाकेबंदी तब तक नहीं खुलेगा रास्ता

अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और वैश्विक तेल व्यापार के लिए सबसे अहम माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz को लेकर ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि इस समुद्री मार्ग को तभी खोला जाएगा जब अमेरिका अपनी आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह खत्म कर देगा और ईरान की सभी शर्तों को मानेगा। मौजूदा समय में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान के आयात और निर्यात पर गहरा असर पड़ा है, जिससे देश को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
प्रतिबंधों और अमेरिकी दबाव का सामना कर रहा ईरान
12 सितंबर 2026 तक की स्थिति के मुताबिक, ईरानी राष्ट्रपति अमेरिकी दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं हैं। उनका साफ कहना है कि पश्चिमी देशों और विशेषकर अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों की वजह से ईरान के कुल आयात और निर्यात में 25 से 35 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसके बावजूद देश अपनी शर्तों पर अड़ा हुआ है और बिना समझौते के इस रास्ते को खोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का जलमार्ग पर कड़ा पहरा
ईरान का Revolutionary Guards इस पूरे समुद्री मार्ग पर अपनी कड़ी नजर बनाए हुए है और उनका साफ निर्देश है कि बिना अनुमति के कोई भी जहाज इस रास्ते से नहीं गुजर सकता है। सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव Mohsen Rezaee ने जानकारी दी है कि तेहरान इस जलमार्ग को दोबारा खोलने के लिए नियमों और शर्तों को अंतिम रूप दे रहा है। इन शर्तों में मुख्य रूप से प्रतिबंधों को हटाना, विदेशी बैंकों में फंसे ईरान के पैसों को रिलीज करना, ईरानी बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी को समाप्त करना और सैन्य धमकियों को पूरी तरह रोकना शामिल है।
हिंसक झड़पें और जहाजों पर हमले
हाल के दिनों में इस क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। सितंबर 2026 के शुरुआती हफ्तों में ईरान ने होर्मुज जलमार्ग के पास लगभग 10 जहाजों को निशाना बनाया। यह कार्रवाई अमेरिकी सैन्य हमलों के जवाब में की गई थी, जिनमें ईरान के 5 टैंकर पूरी तरह डूब गए थे। इस लगातार जारी तनाव और संघर्ष को देखते हुए अब ईरान ने इस जलमार्ग के बाहर एक नया समुद्री 'exclusion zone' यानी निषेध क्षेत्र बनाने की घोषणा की है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर और अधिक संकट मंडराने लगा है।
कूटनीतिक प्रयास और कड़े अमेरिकी निर्देश
इस संकट को टालने के लिए कई कूटनीतिक प्रयास भी किए गए, जिसमें अगस्त 2026 में पाकिस्तान के आर्मी चीफ Asim Munir द्वारा लाया गया एक प्रस्ताव भी शामिल था। इस प्रस्ताव में प्रतिबंधों में राहत के बदले जहाजों की सुरक्षित आवाजाही और प्रॉक्सी हमलों को रोकने की बात कही गई थी, लेकिन जून 2026 में हुए समझौते के टूटने के बाद से ये बातचीत फिलहाल रुक गई है। हालांकि अमेरिका का कहना है कि यह एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है और अमेरिकी सैन्य सुरक्षा के साये में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही जारी है। इसी बीच अमेरिकी सेना ने 12 सितंबर 2026 को नए निर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत टैंकरों को हमलों के खतरे से बचाने के लिए केवल तय समय पर ही इस रास्ते से गुजरने की अनुमति दी जा रही है।