अमेरिका को ईरान का सात दिन का प्रस्ताव, स्ट्रेट ऑफ होरमुज विवाद सुलझाने की कोशिश.

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने अमरीका के सामने एक नया प्रस्ताव रखा है। कतर के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र महासभा में शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को यह सात दिन की योजना पेश की गई। इसका मकसद स्ट्रेट ऑफ होरमुज में चल रहे तनाव को खत्म करना है। इस योजना के तहत छठे दिन जलडमरूमध्य को फिर से खोल दिया जाएगा और सातवें दिन दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू होगी।
समझौते के लिए ईरान की मुख्य मांगें
इस प्रस्ताव के अनुसार ईरान की कई मांगें शामिल हैं। इसमें ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को हटाना, तेल निर्यात पर प्रतिबंधों को खत्म करना और 12 अरब डॉलर से ज्यादा की रोकी गई ईरानी संपत्ति को जारी करना शामिल है। इसके अलावा मध्य पूर्व में, खासकर लेबनान और यमन में युद्धविराम की बात भी कही गई है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने साफ किया है कि यमन में जंग खत्म होना उनकी पहली शर्त है। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने भी कहा है कि अगर लंबी अवधि का समझौता होता है तो वे संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निरीक्षकों को देश में आने की अनुमति देंगे।
अमेरिका का रुख और कतर की मध्यदस्थता
विदेश मंत्री Abbas Araghchi और अमेरिकी दूत Steve Witkoff के बीच 22 सितंबर को चर्चा हुई थी। कतर के विदेश मंत्री Sheikh Mohammed bin Abdulrahman Al Thani ने भी मध्यस्थता की पूरी कोशिश की और राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian से मुलाकात की। इसके बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की बात पर भरोसा करने से इनकार कर दिया और सैन्य कार्रवाई जारी रखने की बात कही। अमेरिकी सेंट्रल कमांड लगातार नाकाबंदी संभाल रही है और 25 सितंबर तक 122 जहाजों को डायवर्ट किया जा चुका है। राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इस रास्ते का नाम 'ट्रंप स्ट्रेट' भी लिख दिया है। इस पूरी स्थिति का असर तेल की कीमतों पर भी पड़ा है और कीमतों में थोड़ी गिरावट देखने को मिली है, जबकि सऊदी अरब ने भी अमेरिका की तरह इस diplomatic पहल पर संदेह जताया है।