अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान ने किया बड़ा दावा.

Sushma Kumari6 September 20263 min read33 viewsWorld
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान ने किया बड़ा दावा.

फारस की खाड़ी में हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर इसका सीधा असर दिख रहा है। 6 सितंबर 2026 को ईरान ने आधिकारिक तौर पर बयान दिया कि Strait of Hormuz अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए पूरी तरह खुला हुआ है, लेकिन अमेरिका की हरकतों ने समुद्री रास्तों को बाधित कर दिया है। इस क्षेत्र में इस साल 28 फरवरी से लगातार तनाव चल रहा है और स्थिति तब और बिगड़ गई जब 13 अप्रैल 2026 को अमेरिका ने यहां नौसेना की नाकाबंदी लागू कर दी। आम लोगों और खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों के बीच इस बात की चिंता बढ़ गई है कि अगर यह टकराव और ज्यादा फैला, तो जरूरी सामानों और तेल की सप्लाई पर बुरा असर पड़ सकता है।

ईरान और अमेरिका के बीच दावों और हमलों का दौर तेज

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख Mohsen Rezaei ने ऐलान किया है कि वे जलडमरूमध्य के बाहर एक नया प्रतिबंधित क्षेत्र यानी एक्सक्लूजन जोन बनाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई भी जहाज इस पाबंदी वाले इलाके में घुसा, तो उसे ईरानी प्रतिबंध सूची में डाल दिया जाएगा। ईरान ने रविवार को यह भी दावा किया कि उसने इस जोन में घुसने वाले एक मानवरहित अमेरिकी जहाज को सफलतापूर्वक निशाना बनाया है। दूसरी तरफ, अमेरिकी सेना और CENTCOM ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया और इसे सरासर झूठ बताया। अमेरिकी सेना के अधिकारियों का कहना है कि वे क्षेत्रीय सुरक्षा बनाए रखने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं।

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अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई और तेल टैंकरों पर हमला

CENTCOM कमांडर एडमिरल Brad Cooper ने पुष्टि की कि अमेरिकी बलों ने 5 सितंबर 2026 को तीन ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाया। यह कार्रवाई ईरानी बलिस्टिक मिसाइलों के जवाब में की गई थी जो अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों पर दागी गई थीं। 6 सितंबर 2026 तक अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी में 20 से अधिक युद्धपोत शामिल हो चुके हैं, जिनकी वजह से 92 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदला गया है और तीन जहाज पूरी तरह निष्क्रिय हो चुके हैं। अमेरिकी ऊर्जा सचिव Chris Wright ने जानकारी दी कि इस सबके बावजूद रोजाना लगभग 9 मिलियन बैरल तेल इस रास्ते से गुजर रहा है, क्योंकि अमेरिकी नाकाबंदी का मुख्य निशाना केवल ईरान से जुड़े जहाज ही हैं।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर

IRGC Navy का दावा है कि इस जलमार्ग पर उनका पूरी तरह से और निर्णायक नियंत्रण है और वे अमेरिका के बयानों को पूरी तरह खारिज करते हैं। इस बढ़ते तनाव को देखते हुए कनाडा की मंत्री Anita Anand और François-Philippe Champagne ने 6 सितंबर 2026 को एक संयुक्त बयान जारी किया। उन्होंने ईरान की इन हरकतों की कड़ी निंदा की और नेविगेशन की स्वतंत्रता बनाए रखने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का समर्थन किया। इसके अलावा, यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस यानी UKMTO ने भी इस क्षेत्र में आईआरजीसी द्वारा लगातार जहाजों को परेशान किए जाने को लेकर चेतावनी जारी की है। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के सैन्य टकराव से खाड़ी देशों में रहने वाले और काम करने वाले लाखों लोगों की आजीविका पर भी असमंजस के बादल मंडराने लगे हैं।

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