अमेरिका के नए प्रतिबंधों से ईरान के छात्रों की बढ़ी मुश्किलें, पढ़ाई के रास्ते हुए बंद.

अमेरिका के द्वारा लगाए गए नए प्रतिबंधों और शैक्षणिक पाबंदियों के बाद से ईरान के छात्रों में भारी निराशा और चिंता का माहौल देखा जा रहा है। इन नए नियमों की वजह से अब ईरानी युवाओं के लिए विदेश में पढ़ाई करना बेहद मुश्किल हो गया है। आम लोग इस स्थिति से काफी परेशान हैं क्योंकि इसका सीधा असर उनकी पढ़ाई और भविष्य के सपनों पर पड़ रहा है।
क्या हैं अमेरिका के नए प्रतिबंध और कब से लागू हुए नियम
24 अगस्त 2026 को अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल यानी OFAC ने जनरल लाइसेंस जी को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दिया है। यह नीति साल 2014 से लागू थी जिसके तहत शैक्षणिक आदान-प्रदान, गैर-लाभकारी शैक्षणिक सेवाओं और पेशेवर तथा यूनिवर्सिटी प्रवेश परीक्षाओं के आयोजन की अनुमति मिलती थी। इसके बाद 1 सितंबर 2026 से डुओलिंगो ने ईरान में या ईरानी सरकारी पहचान पत्र का इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए अपनी अंग्रेजी परीक्षा देना आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया है।
इसी तरह ETS यानी एजुकेशनल टेस्टिंग सर्विस जिसके तहत TOEFL और GRE परीक्षाएं होती हैं, उसने भी अमेरिकी प्रतिबंध कानूनों का पूरी तरह पालन करने के लिए ईरान में टेस्टिंग को रोक दिया है। इससे पहले इस साल 2016 के शुरुआती महीनों में नियामक और वित्तीय कारणों की वजह से आईईएलटीएस भाषा परीक्षा का आयोजन भी देश के भीतर बंद हो चुका है। जनरल लाइसेंस जी के तहत पहले से मंजूर गतिविधियों के लिए एक विंड-डाउन अवधि तय की गई थी जो 8 सितंबर 2026 को समाप्त होने वाली है और उसके बाद विशेष अनुमति की जरूरत होगी।
विदेशी प्रतिबंधों के साथ देश के भीतर भी कड़े नियम
ट्रंप प्रशासन द्वारा इन नए उपायों को 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' का नाम दिया गया है और ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने इसे एक बड़ा आर्थिक हमला बताया है। इन कदमों के तहत विमानन, डिजिटल संपत्ति, सोना, शिपिंग और टेक्नोलॉजी पर भी माध्यमिक प्रतिबंध बढ़ा दिए गए हैं। यह सब जनवरी 2026 में ईरानी नागरिकों के लिए immigrant और nonimmigrant वीजा जारी करने पर लगी रोक के बाद शुरू हुआ है। दूसरी तरफ ईरानी सरकार ने भी अपने आंतरिक नियमों को और ज्यादा सख्त कर लिया है।
18 अगस्त 2026 को ईरानी संसद ने एक नया कानून पास किया है जिसके तहत विदेशी विश्वविद्यालयों या शोध संस्थानों के साथ बिना अनुमति के शैक्षणिक सहयोग करना अपराध माना गया है। इस नए कानून के तहत ऐसे सहयोग करने वालों को 6 महीने से 2 साल तक की जेल की सजा मिल सकती है और ईरानी संस्कृति के अनुकूल न लगने वाले कोर्स आयोजित करने पर 5 से 10 साल तक की सजा का प्रावधान है। इन प्रतिबंधों को लागू करने की जिम्मेदारी इंटेलिजेंस मिनिस्ट्री और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स के खुफिया विंग को सौंपी गई है।
मानवाधिकार संगठनों और नेताओं का विरोध
विभिन्न मानवाधिकार समूहों और संगठनों ने इन नीतियों का कड़ा विरोध किया है। नेशनल ईरानी अमेरिकन काउंसिल यानी NIAC के अध्यक्ष जमाल अब्दी ने अमेरिकी प्रतिबंधों को क्रूर बताया है और कहा है कि इनसे ईरानी सरकार की बजाय आम नागरिकों को ज्यादा नुकसान पहुंच रहा है। इसके अलावा हना ह्यूमन Rights ऑर्गेनाइजेशन ने भी एक कड़ी आपत्ति जताई है और ऐसी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई है जो आम जनता के लिए शिक्षा और पढ़ाई के अवसरों को सीमित करती हैं।