ब्रिटिश पीएम के बयानों पर भड़का ईरान, तेहरान में राजदूत को किया तलब

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में उस वक्त तनाव और बढ़ गया जब ईरान ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री के बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई। ईरान के विदेश मंत्रालय ने हाल ही में एक सुरक्षा घटना को लेकर लगाए गए आरोपों के बाद तेहरान में ब्रिटेन के राजदूत ह्यूगो शॉर्टर को औपचारिक रूप से तलब किया। इस कड़े कूटनीतिक कदम के जरिए ईरान ने ब्रिटिश प्रशासन के रुख के खिलाफ अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
क्या है RAF फेयरफोर्ड विवाद?
यह पूरा विवाद सितंबर के आखिरी हफ्ते में ब्रिटेन स्थित आरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस के पास हुई एक घटना से जुड़ा है। इस सैन्य ठिकाने के नजदीक से पांच लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिसके बाद ब्रिटिश सरकार ने इसे एक संभावित आतंकी साजिश से जोड़ने की कोशिश की। हालांकि, बिना किसी विस्फोटक की बरामदगी के उन सभी संदिग्धों को अगले ही दिन जमानत पर रिहा कर दिया गया था। इसके बावजूद, ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्बरम ने इस घटना में ईरान की संलिप्तता के मजबूत संकेत होने का दावा किया था, जिसके बाद तेहरान का गुस्सा फूट पड़ा।
ईरान ने आरोपों को बताया 'निराधार और हास्यास्पद'
तेहरान में हुई इस बैठक के दौरान ईरान के राजनीतिक मामलों के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांछी ने ब्रिटिश बयानों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने इन आरोपों को पूरी तरह से 'झूठे और हास्यास्पद' करार दिया। तख्त-रवांछी ने ब्रिटेन के इस 'विनाशकारी दृष्टिकोण' पर गहरी नाराजगी जताई और मांग की कि ब्रिटिश सरकार आधिकारिक रूप से इस मामले में स्थिति स्पष्ट करे और अपनी गलती सुधरे।
ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों का यह भी कहना है कि ब्रिटेन को अपनी उन नीतियों और सैन्य सुविधाओं के इस्तेमाल पर अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी लेनी चाहिए जिनका उपयोग क्षेत्रीय स्थिरता के खिलाफ किया जाता है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री गलत दिशा में निशाना साध रहे हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जिन लोगों को शुरुआती दौर में खतरनाक आतंकवादी बताया गया था, उनकी तुरंत रिहाई ही इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि इन दावों में कोई दम नहीं था।
आगे क्या होगा?
ब्रिटिश राजदूत ह्यूगो शॉर्टर ने ईरान के इस कड़े विरोध को स्वीकार कर लिया है और आश्वासन दिया है कि वह तेहरान की इन भावनाओं और चिंताओं को तुरंत लंदन तक पहुंचाएंगे। बहरहाल, इस घटना ने एक बार फिर से पश्चिमी देशों और ईरान के बीच चल रहे कूटनीतिक तनाव को सतह पर ला दिया है, और आने वाले दिनों में दोनों देशों के रिश्तों पर इसका असर पड़ना तय माना जा रहा है।