यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सैन्य कैंप पर हमले के बाद ईरान पर हथियार और ट्रेनिंग देने के गंभीर आरोप लगे

यमन: यमन के दक्षिणी शबवा प्रांत में हूती विद्रोहियों ने एक सरकारी सैन्य कैंप पर हमला किया है। इस हमले में कम से कम 20 सैनिकों की मौत हो गई और दर्जनों अन्य घायल हुए हैं। यमनी सरकार ने इस हमले के बाद हूती समूह को ईरान द्वारा समर्थित बताया है।
यमन की अधिकारी अफराह अल-ज़ौबा ने 18 अक्टूबर 2026 को कहा कि ईरान इस संघर्ष में मध्यस्थ की भूमिका नहीं निभा सकता। उन्होंने बताया कि ईरान खुद इस लड़ाई में एक सक्रिय भागीदार है और हूतियों को फंडिंग, ट्रेनिंग, मिसाइल, ड्रोन और हथियार मुहैया करा रहा है।
इसी बीच मिस्र के शीर्ष सुरक्षा निकाय ने भी 18 अक्टूबर को सऊदी अरब को अपना पूरा समर्थन देने का वादा किया है। मिस्र ने कहा कि वह ईरान समर्थित हूती बलों के हमलों के खिलाफ सऊदी अरब के साथ खड़ा है।
अमेरिका ने भी एक सुरक्षा चेतावनी जारी की है जिसमें कहा गया है कि ईरान समर्थित हूती समूह सऊदी अरब के खिलाफ शत्रुतापूर्ण गतिविधियों में शामिल हैं। इसमें नागरिक हवाई अड्डों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को निशाना बनाना शामिल है।
द वॉल स्ट्रीट जर्नल की 17 अक्टूबर की खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान हूतियों को सऊदी अरब पर हमलों के लिए टारगेटिंग इंटेलिजेंस और सामरिक मार्गदर्शन दे रहा है। रिपोर्ट में ड्रोन, मिसाइल सहायता और ट्रेनिंग देने की बात भी कही गई है।
इजरायली रक्षा खुफिया विभाग के पूर्व अधिकारी डैनी सिट्रिनोविच ने 17 अक्टूबर को इस साझेदारी को एक बहुत मजबूत रणनीतिक सहयोग बताया। कुछ अन्य आरोपों के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और हिजबुल्लाह के एजेंट यमन में रडार और मिसाइल सिस्टम की तैनाती और ट्रेनिंग में मदद कर रहे हैं।
दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बग़ाई ने पहले कहा था कि हूती स्वतंत्र रूप से काम करते हैं। हूती अधिकारी मोहम्मद अल-बुखैती ने भी ईरान की सैन्य भागीदारी की खबरों को बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया कहकर खारिज कर दिया है।
विश्लेषकों का कहना है कि इस गठबंधन की गोपनीयता दोनों पक्षों को आरोपों से बचने का मौका देती है। इस रणनीतिक साझेदारी की मदद से हूतियों ने लाल सागर के तट और बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के पास अपना क्षेत्रीय नियंत्रण और सामरिक क्षमता बढ़ा ली है।