ईरान के सर्वोच्च नेता का सैन्य बलों को सख्त आदेश, अमेरिकी और इजरायली ठिकानों को निशाने पर रखने का निर्देश
सर्वोच्च नेता मुजतबा खमेनी ने अमेरिकी और इजरायली ठिकानों को निशाने पर लेने और सैन्य तैयारी तेज करने का निर्देश दिया है।

तेहरान: ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खमेनी ने सशस्त्र बलों को सख्त निर्देश देते हुए किसी भी दुश्मन के खतरे का तत्काल और बिना किसी भौगोलिक सीमा के जवाब देने को कहा है। उन्होंने सैन्य बलों को आदेश दिया है कि वे अपने टारगेट लिस्ट को अपडेट करें ताकि अमेरिका और इजरायल की भौतिक और गैर-भौतिक संपत्तियां ईरानी सेना की जद में आ सकें।
वरिष्ठ कमांडरों के साथ एक बैठक में खमेनी ने चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही, आर्मी कमांडर मेजर जनरल अमीर हातेमी और IRGC कमांडर मेजर जनरल अहमद वहिदी को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भविष्य में किसी भी सैन्य या आतंकवादी हमले को समाप्त करने की शर्तें ईरान खुद तय करेगा। उन्होंने अधिकतम प्रतिरोध स्थापित करने के लिए 'इंटेलिजेंट कॉम्बैट रेडिनेस' और एकजुटता पर जोर दिया।
यह सैन्य सख्ती ऐसे समय में आई है जब कतर और पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच बड़े संघर्ष को रोकने के लिए मध्यस्थता की कोशिशें कर रहे हैं। शुक्रवार को तेहरान में 12 घंटे चली बातचीत के बाद कतरी प्रतिनिधिमंडल दोहा चला गया, जहां शनिवार, 31 अक्टूबर को फिर से बातचीत होनी है।
खबरों के मुताबिक, परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य में नेविगेशन और वित्तीय प्रोत्साहनों को लेकर चल रही अप्रत्यक्ष बातचीत में कोई बड़ी सफलता मिल सकती है। इस संभावित समझौते में चीन और रूस गारंटर की भूमिका निभा सकते हैं।
तनाव के बीच ईरानी सेना के प्रवक्ता मोहम्मद अकरमनिया ने चेतावनी दी है कि अमेरिका द्वारा किसी भी हमले से व्यापक तनाव बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिकी प्रशासन 'जियोनिस्टों' को खुश करने के लिए क्षेत्रीय रोमांच में शामिल होता है, तो इसके नतीजे गंभीर होंगे। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी दोहराया कि ईरानी बल उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे जो जनता को नुकसान पहुंचाते हैं।
दूसरी ओर, अमेरिकी सरकार परमाणु रियायतों के लिए ईरान पर दबाव बना रही है। वहीं तेहरान ने नौसैनिक नाकाबंदी हटाने, जमी हुई धनराशि जारी करने और तेल बिक्री फिर से शुरू करने की मांग की है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कथित तौर पर ईरानी सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रजाई को पत्र लिखकर संवाद किया है। इसके बावजूद ऐसी खबरें हैं कि अमेरिका ने अपने खाड़ी सहयोगियों को चेतावनी दी है कि वे 4 नवंबर के अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद संभावित हमलों के लिए तैयार रहें।