Iran Supreme Leader Mojtaba Khamenei: ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने गल्फ देशों से की अपील, अमेरिका और इसराइल को बताया असली दुश्मन.

रविवार, 30 अगस्त 2026 को पैगंबर मोहम्मद साहब के जन्मदिन के मौके पर ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने टेलीग्राम अकाउंट के जरिए एक औपचारिक लिखित संदेश जारी किया। इस संदेश में उन्होंने गल्फ देशों के शासकों से अपील की कि वे अपने असली दुश्मन को पहचानें और मुस्लिम एकता को मजबूत बनाने के लिए आगे आएं। उन्होंने अमेरिका के आपराधिक शासकों और इसराइल के फर्जी जायोनी शासन को मुस्लिम दुनिया का मुख्य विरोधी बताया। मोजतबा खामेनेई ने दुनिया भर के मुसलमानों से आपसी रक्षा, सहयोग और एकता बनाए रखने की बात कही और चेतावनी दी कि बाहरी ताकतें नस्ल, संस्कृति, समाज, अर्थव्यवस्था और भूगोल के आधार पर फूट डालने की कोशिश कर रही हैं।
छह महीने बाद सामने आया संदेश
यह संदेश मोजतबा खामेनेई की तरफ से एक दुर्लभ बातचीत या बयान के रूप में सामने आया है, क्योंकि वह पिछले छह महीने से सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह उसी अमेरिकी-इसराइली हवाई हमले में घायल हो गए थे जिसमें उनके पिता और पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इस बयान से पहले हाल ही में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने क्षेत्रीय अस्थिरता और इसराइली आक्रामकता का मुकाबला करने के लिए पाकिस्तान, सऊदी अरब, यूएई, कतर, ओमान, अफगानिस्तान, तुर्की, मिस्र, अजरबैजान और तुर्कमेनिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के साथ मजबूत रिश्तों की वकालत की थी।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य और क्षेत्रीय हालात
इसी बीच, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबफ ने चेतावनी दी कि बाहरी ताकतों पर निर्भर रहने वाली क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्थाएं बहुत कमजोर होती हैं। वहीं, उप विदेश मंत्री काज़ेम घरीबाबादी ने पुष्टि की कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी बंद है और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स इस पर पूरा नियंत्रण बनाए हुए है। उन्होंने जलमार्ग को लेकर अमेरिका के बयानों को कीमत में हेरफेर करने वाली रणनीति बताया। वर्तमान में इराक तेहरान और वाशिंगटन के बीच मध्यस्थता करने की कोशिश कर रहा है।
घरेलू अर्थव्यवस्था और नए अमेरिकी प्रतिबंध
इससे ठीक एक दिन पहले यानी 29 अगस्त 2026 को मोजतबा खामेनेई ने ईरान से घरेलू उत्पादन पर ध्यान देने और नए अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद आने वाली आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने का आग्रह किया था। ईरान में इस समय महंगाई और बेरोजगारी जैसी घरेलू आर्थिक समस्याएं चल रही हैं, जिनसे निपटने के लिए यह कदम उठाने की बात कही गई है। गल्फ देशों और ईरान के बीच चल रहे इन घटनाक्रमों पर दुनिया भर की नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि इसका असर क्षेत्रीय सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर सीधा पड़ता है।