जॉर्डन के एयरबेस पर ईरान का बड़ा मिसाइल हमला, अमेरिकी ठिकानों को बनाया निशाना, 20 मिसाइलें हवा में रोकी गईं.

हाल के हफ्तों में पश्चिम एशिया का माहौल एक बार फिर काफी गर्म हो गया है और ईरान ने सीधे तौर पर जॉर्डन के अल-अजराक के पास स्थित मुवाफ्फक साल्टी एयर बेस को अपने बैलिस्टिक मिसाइल हमलों का मुख्य निशाना बनाया है। इस्लामिक गणराज्य ईरान इस सैन्य ठिकाने को अमेरिकी फौजों का मुख्य ऑपरेशनल हब मानता है और इसी वजह से इसे एक वैध सैन्य लक्ष्य के रूप में देखा जा रहा है। इस तनाव के बीच हाल ही में एक बड़ी घटना सामने आई है जब 8 सितंबर 2026 या स्थानीय समय के अनुसार 9 सितंबर 2026 को ईरान की तरफ से इस एयर बेस पर भारी बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। इससे पहले भी फरवरी और जुलाई 2026 में इस तरह के हमले रिकॉर्ड किए जा चुके हैं, जिससे साफ होता है कि क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ता ही जा रहा है और इसका असर आम जनजीवन के साथ-साथ वहां रहने वाले प्रवासियों की सुरक्षा पर भी पड़ रहा है।
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्क्स ने ली हमले की जिम्मेदारी
इस खतरनाक हमले की जिम्मेदारी पूरी तरह से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्क्स (IRGC) ने ली है और उनका कहना है कि यह अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का सीधा बदला है जो उन्होंने ईरानी टैंकरों के खिलाफ की थी। ईरानी विदेश मंत्रालय ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हुए इन मिसाइल हमलों को अपनी आत्मरक्षा का अधिकार बताया है। ईरान का तर्क है कि पिछले एक हफ्ते के दौरान अमेरिकी फौजों ने उनके 10 ईरानी टैंकरों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया था, जिसके जवाब में यह कार्रवाई की गई है। हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने इन ईरानी टैंकरों को नष्ट करने की पुष्टि तो की है, लेकिन साथ ही ईरान के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों को नुकसान पहुंचाने की बात कही गई थी।
जॉर्डन और अमेरिकी सेना ने की मिसाइलों को रोकने की कोशिश
जब 8 और 9 सितंबर की दरमियानी रात को यह हमला हुआ, तब ईरानी सेना ने क्लस्टर म्यूनिशन बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया था। जॉर्डन के सशस्त्र बलों ने मुस्तैदी दिखाते हुए कुल 20 आने वाली मिसाइलों का पता लगाया और उनमें से 18 मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। बाकी बची हुई दो मिसाइलें ऐसी जगहों पर गिरीं जहां कोई आबादी नहीं थी, जिसकी वजह से किसी भी तरह के जानमाल का कोई नुकसान नहीं हुआ। इसके साथ ही अमेरिकी सेना ने अपनी सुरक्षा के लिए 30 से ज्यादा पैट्रियट मिसाइलों को तैनात किया ताकि दुश्मन के हमलों को नाकाम किया जा सके।
अमेरिकी सैन्य विमानों को हुआ नुकसान
इतनी सुरक्षा और इंटरसेप्शन के बाद भी अमेरिकी सेना के कुछ विमानों को इस हमले में नुकसान उठाना पड़ा है। सीबीएस न्यूज और एयर एंड स्पेस फोर्स मैगजीन की रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस एयर बेस पर खड़े एक A-10 थंडरबोल्ट II विमान के पंख को गंभीर नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा लगभग आठ F-15E स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमानों को भी हल्का नुकसान हुआ है, हालांकि गनीमत यह रही कि वे अभी भी पूरी तरह से चालू स्थिति में हैं। इस बार के हमले में किसी भी अमेरिकी सैनिक की मौत की खबर सामने नहीं आई है, लेकिन पुरानी घटनाओं को याद करें तो इसी साल जुलाई 2026 में इसी सैन्य सुविधा पर हुए एक मिसाइल हमले में तीन अमेरिकी सैनिकों की जान चली गई थी। इस तरह की घटनाओं से खाड़ी देशों में काम करने वाले लोगों और वहां आने-जाने वाले यात्रियों के मन में भी सुरक्षा को लेकर चिंताएं बनी रहती हैं।