होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के अवैध रास्तों के इस्तेमाल पर ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को हमले की धमकी दी
ईरान के IRGC ने चेतावनी दी है कि अगर जहाजों ने अवैध रास्तों का इस्तेमाल किया तो वह अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला कर सकता है।

तेहरान: ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिका को सख्त चेतावनी दी है। ईरान ने कहा है कि अगर जहाजों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में उन समुद्री रास्तों का इस्तेमाल जारी रखा जिन्हें तेहरान अवैध मानता है, तो वह क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला कर सकता है।
यह धमकी ऐसे समय में आई है जब इलाके में समुद्री तनाव काफी बढ़ गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तरी फारस की खाड़ी में जहाज से जहाज में तेल ट्रांसफर करने वाले चार जहाजों पर एक साथ हमला हुआ और उनमें आग लग गई। इसके अलावा बुधवार शाम को जलडमरूमध्य के पश्चिम में नौसैनिक सुरंगों की चपेट में आने से तीन अन्य जहाज भी ठप हो गए।
IRGC ने इस जलमार्ग पर अपने नियंत्रण का दावा करते हुए इन घटनाओं के लिए अमेरिकी सेना को जिम्मेदार ठहराया है। ईरान का आरोप है कि वाशिंगटन द्वारा जहाजों को इन रास्तों से ले जाने की जिद की वजह से यह नुकसान हुआ है।
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रज़ई ने चेतावनी दी कि अगर युद्ध हुआ तो यह संघर्ष डेटा सेंटरों, एआई सुविधाओं और समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों तक फैल जाएगा। रज़ई ने कहा कि जलडमरूमध्य का प्रबंधन टोल वसूलने का मामला नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है।
वहीं ईरानी सेना के कमांडर मेजर जनरल अमीर हातमी ने बताया कि देश एसिमेट्रिक वारफेयर के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि ईरान के पास मानवरहित प्रणालियों और ड्रोन की उन्नत क्षमताएं मौजूद हैं।
तनाव तब और बढ़ गया जब यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने बताया कि बुधवार को ओमान के बखा के पास एक तेल टैंकर पर अज्ञात मिसाइल से हमला हुआ। ईरान का कहना है कि ओमान द्वारा निर्धारित दक्षिणी समुद्री कॉरिडोर अवैध है।
इस अस्थिरता के बीच केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक फारस की खाड़ी से कच्चे तेल का निर्यात युद्ध से पहले के स्तर से अधिक रहा है। हालांकि, ताजा घटनाक्रम के बाद ब्रेंट क्रूड तेल की कीमतें करीब 3 प्रतिशत बढ़कर 112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं।
विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बुधवार को बताया कि सात दिनों के युद्धविराम के प्रस्ताव पर अप्रत्यक्ष बातचीत जारी है। दूसरी ओर, ईरान और उसके सहयोगियों की धमकियों के बाद अमेरिकी सेना ने मध्य पूर्व के विभिन्न ठिकानों पर अपनी मौजूदगी कम कर ली है।
इस संकट को सुलझाने के लिए शुक्रवार को इस्तांबुल में यूरोपीय और मध्य पूर्वी देशों के शीर्ष अधिकारी बैठक करने वाले हैं।