स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तनाव: ईरान देगा अमेरिकी प्रस्ताव पर जवाब

Gautam Sahu4 October 20262 min read0 viewsWorld
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तनाव: ईरान देगा अमेरिकी प्रस्ताव पर जवाब

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच कूटनीतिक मोर्चे पर एक नया मोड़ आया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने हाल ही में अमेरिकी काउंटर-प्रस्ताव पर अपने अतिरिक्त बिंदु सौंपने की घोषणा की है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब कतर के माध्यम से अमेरिका और ईरान के बीच संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है, लेकिन सामरिक मोर्चे पर तनाव अब भी चरम पर बना हुआ है।

क्या है पूरा मामला?

विवाद के केंद्र में मुख्य रूप से सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) की स्थिति और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी शामिल है। ईरान का सात सूत्रीय शांति प्रस्ताव इस जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की शर्त पर आधारित है, बशर्ते अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई नाकेबंदी को हटाया जाए।

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हालाँकि, दोनों देशों की प्राथमिकताओं में बड़ा अंतर साफ दिखाई दे रहा है। जहाँ तेहरान का मुख्य फोकस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति और नाकेबंदी को खत्म करने पर है, वहीं अमेरिकी प्रस्तावों में मुख्य रूप से परमाणु मुद्दों को प्राथमिकता दी जा रही है।

बढ़ता तनाव और तीखे बयान

  • अमेरिकी रुख: अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को लेकर अंतिम फैसला लेने के संकेत दिए हैं और बातचीत की संभावना पर सवाल उठाए हैं। वहीं, अमेरिकी रक्षा सचिव ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह मजबूत बनाए रखने की बात दोहराई है।
  • ईरानी संसद और कूटनीति: ईरानी संसद के स्पीकर ने दो टूक कहा है कि जब तक जून के अंतरिम समझौते की सभी सात शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रहेगा। साथ ही, ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह बातचीत के साथ-साथ हर स्थिति के लिए तैयार है।
  • मैदान पर हालात: इसी बीच, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास एक टैंकर पर अज्ञात प्रक्षेपास्त्र (projectile) से हमले की खबर ने सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

आगे क्या होगा?

ईरानी विदेश मंत्री का कहना है कि इस संघर्ष का कोई सैन्य समाधान नहीं है और यदि शर्तें मान ली जाएं तथा नाका हटा लिया जाए, तो यह जलमार्ग सात दिनों के भीतर पूरी तरह फिर से खुल सकता है। हालांकि, वर्तमान में दोनों देशों के बीच किसी भी सीधी बातचीत का कोई नया कार्यक्रम तय नहीं है और कूटनीति के साथ-साथ तनाव के बादल गहराते जा रहे हैं।

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