अमेरिका पर निर्भरता कम करेगा ईरान, ब्रिक्स बैंक से जुड़ने की तैयारी से दुनिया भर में मची हलचल.

अमेरिकी डॉलर और पश्चिमी देशों की मुद्रा पर अपनी निर्भरता को पूरी तरह से खत्म करने के लिए ईरान ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। अब ईरान ब्रिक्स देशों द्वारा बनाए गए न्यू डेवलपमेंट बैंक यानी एनडीबी की सदस्यता लेने की तैयारी में जुट गया है। इस बड़े फैसले से ईरानी अर्थव्यवस्था को पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों से राहत मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन का बड़ा बयान
भारत में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए रवाना होने से पहले शुक्रवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने मीडिया से बातचीत की। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों ने मिलकर एक खास बैंक का निर्माण किया है। उन्होंने पूरी उम्मीद जताई कि सभी सदस्य देश इस बैंक में अपना निवेश काफी हद तक बढ़ाएंगे। इससे आपस में व्यापार करते समय डॉलर की जरूरत खत्म हो जाएगी और स्थानीय मुद्राओं में ही पैसों का लेन-देन आसानी से हो सकेगा।
वित्त मंत्री ने बताई स्थानीय मुद्राओं की अहमियत
ईरान के वित्त मंत्री सैयद अली मदनीज़ादेह ने इस मामले पर अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया कि इस समय ईरान अमेरिका और पश्चिमी देशों के भारी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। ऐसे हालात में देश के लिए स्थानीय मुद्राओं का इस्तेमाल बढ़ाना और डॉलर पर अपनी निर्भरता को कम करना सबसे ज्यादा जरूरी काम बन गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भुगतान करने के नए तरीकों को बढ़ावा देना ईरान के लिए ब्रिक्स संगठन की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक साबित हो सकता है।
क्या है न्यू डेवलपमेंट बैंक का इतिहास और काम
ब्रिक्स के संस्थापक देशों ने मिलकर जुलाई 2015 में चीन के शंघाई शहर में न्यू डेवलपमेंट बैंक की स्थापना की थी। इस बैंक का मुख्य मकसद दुनिया भर के उभरते हुए देशों में बुनियादी ढांचे यानी इंफ्रास्ट्रक्चर और सतत विकास से जुड़ी योजनाओं के लिए समय पर वित्तीय मदद मुहैया कराना है। नए सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 के आखिर तक इस बैंक ने लगभग 44 अरब डॉलर मूल्य की 141 अलग-अलग परियोजनाओं को मंजूरी दी थी। हाल ही में उज़्बेकिस्तान के जुड़ने के बाद इस बैंक के कुल सदस्य देशों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है।
ईरान के लिए क्यों जरूरी है यह कदम
ईरान पिछले काफी लंबे समय से अमेरिकी और पश्चिमी देशों के लगाए गए कड़े प्रतिबंधों की मार झेल रहा है। ऐसे कड़े वक्त में डॉलर की जगह अपनी या स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करना और वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों को अपनाना ईरान के रणनीतिक भविष्य के लिए बहुत मायने रखता है। एनडीबी बैंक में ईरान के शामिल होने से उसे ब्रिक्स के बाकी देशों के साथ अपने वित्तीय संबंधों को मजबूत करने का मौका मिलेगा। साथ ही देश की बुनियादी विकास परियोजनाओं के लिए पैसों के नए और वैकल्पिक स्रोत भी आसानी से मिल सकेंगे। इस बारे में अधिक जानकारी आप हिन्दुस्थान समाचार की रिपोर्ट में देख सकते हैं।