Iran News: ईरान ने सेंट्रल बैंक में ट्रांसफर किए <strong>$7.5 बिलियन</strong>, तेल राजस्व को लेकर सरकार के बयानों में भारी विरोधाभास.

ईरान के सरकारी तंत्र से तेल की कमाई और विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। Iranian authorities ने ऐलान किया है कि उन्होंने तेल से मिलने वाले विदेशी मुद्रा राजस्व का $7.5 billion हिस्सा सीधे Central Bank of Iran में ट्रांसफर कर दिया है। यह बड़ी रकम ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी Fars news agency और Iranian Oil Ministry के हवाले से सामने आई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2026 के पहले चार महीनों में ईरान के तेल राजस्व में पिछले साल की तुलना में पूरे 50% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इन पैसों का इस्तेमाल इस साल के आखिर यानी दिसंबर तक देश के विदेशी मुद्रा से जुड़े खर्चों को पूरा करने के लिए किया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और अमेरिकी नाकाबंदी के बीच दावों की सच्चाई
ईरान के इन बयानों के पीछे सरकार का यह दावा भी शामिल है कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और अमेरिका की सख्त नौसेना नाकाबंदी को पूरी तरह से मात दे दी है। अधिकारियों का यहां तक कहना है कि उन्होंने अमेरिकी जहाजों तक को अप्रत्यक्ष रूप से तेल बेचने का काम किया है। हालांकि, जमीन पर हालात कुछ और ही तस्वीर बयां करते हैं और इन रिपोर्ट्स को लेकर काफी विवाद छिड़ा हुआ है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान Al Jazeera इन तमाम गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है और लाइव अपडेट्स के जरिए पूरी स्थिति पर नजर रख रहा है क्योंकि ईरानी सरकार के भीतर से ही एक-दूसरे के विरोधी बयान सामने आ रहे हैं।
सेंट्रल बैंक गवर्नर के बयानों ने बढ़ाई उलझन
मामले में नया मोड़ तब आया जब August 20-21, 2026 के आसपास Central Bank of Iran के गवर्नर Abdolnaser Hemmati ने टीवी साक्षात्कारों में बिल्कुल अलग ही कहानी बयां की। गवर्नर हेममती ने खुले तौर पर दावा किया कि युद्ध और लगातार जारी कड़े प्रतिबंधों की वजह से ईरान का तेल निर्यात असल में घटकर शून्य यानी जीरो पर पहुंच चुका है। उन्होंने यह भी साफ किया कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार अमेरिका द्वारा पूरी तरह से ब्लॉक किया जा चुका है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी जानकारी दी कि वाशिंगटन के साथ शांति समझौते यानी Islamabad Memorandum के तहत जिन वित्तीय संपत्तियों के जारी होने की उम्मीद जताई जा रही थी, वे पैसे अभी तक देश को नहीं मिले हैं। सरकार के एक तरफ बड़े दावे और दूसरी तरफ सेंट्रल बैंक के गवर्नर के इन बयानों ने आम लोगों और बाजार में एक बड़ी उलझन पैदा कर दी है।