ईरान ने फिर दोहराया, बच्चो को नहीं छूना चाहिए था", अब Google, META से वसूलेगा इंटरनेट टोल टैक्स, नहीं तो कटेगा केबल.

ईरान की IRGC-संबद्ध समाचार एजेंसी तस्नीम के हवाले से खबर चल रही है कि ईरान गूगल, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न जैसी टेक कंपनियों से होर्मुज़ जलडमरूमध्य के नीचे से गुज़रने वाली समुद्री इंटरनेट केबलों के लिए परमिट, तकनीकी निरीक्षण और "संप्रभुता शुल्क" वसूलने पर विचार कर रहा है। X पर वायरल पोस्ट्स के मुताबिक इसके दायरे में FALCON और Gulf Bridge International (GBI) केबल सिस्टम आते हैं।
टाइमिंग क्यों है धमाकेदार?
यह खबर ऐसे वक्त आई है जब ईरानी नेता मोहसिन रज़ाई ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका और इज़राइल ने जंग दोबारा शुरू की, तो क्षेत्र की समुद्री केबलें, डेटा सेंटर और AI सुविधाएं "तबाह कर दी जाएंगी"। रज़ाई के मुताबिक इन संपत्तियों की कीमत 2 ट्रिलियन डॉलर से ज़्यादा है। यानी एक तरफ वसूली का प्रस्ताव, दूसरी तरफ तबाही की धमकी। सोशल मीडिया पर लोग इसे सीधे शब्दों में कह रहे हैं: "फीस दो, वरना केबल उड़ा देंगे।"
दुनिया के लिए यह इतना बड़ा मुद्दा क्यों है?
- दुनिया का 99% से ज़्यादा अंतरराष्ट्रीय डेटा ट्रैफिक समुद्र के नीचे बिछी केबलों से गुज़रता है
- होर्मुज़ से 5-7 बड़े केबल सिस्टम गुज़रते हैं, जो खाड़ी देशों को बाकी दुनिया से जोड़ते हैं और खाड़ी के AI व क्लाउड प्रोजेक्ट्स की रीढ़ हैं
- खाड़ी में रहने वाले लाखों भारतीयों की वीडियो कॉल, बैंकिंग और ऑनलाइन काम इसी इंटरनेट पर टिके हैं
🔍 अब ज़रूरी सच्चाई: यह "नई" खबर नहीं है
पाठकों के साथ ईमानदारी के लिए यह साफ़ होना चाहिए:
- यह प्रस्ताव मई 2026 से चर्चा में है। तब ईरानी सैन्य प्रवक्ता इब्राहीम ज़ुल्फ़िक़ारी ने X पर लिखा था कि "हम इंटरनेट केबलों पर शुल्क लगाएंगे", और CNN व TIME ने इसे कवर किया था। यानी “BREAKING” का लेबल पुराने मुद्दे की नई कड़ी पर लगा है
- अभी तक कोई औपचारिक कानून पारित नहीं हुआ। TIME के मुताबिक ईरानी सरकार ने तब तक कोई आधिकारिक नीति या कानून नहीं अपनाया था। मौजूदा रिपोर्ट भी "विचार" और "मीडिया में चर्चा" के स्तर की है
- सभी केबलें ईरानी जल-क्षेत्र में नहीं हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक नेटवर्क कंपनियों ने ऐतिहासिक तनाव को देखते हुए ज़्यादातर केबलें ओमान के जल-क्षेत्र वाले दक्षिणी हिस्से से गुज़ारी हैं, जहां ईरान का कानूनी अधिकार नहीं बनता। रिपोर्ट्स के अनुसार सिर्फ दो बड़े सिस्टम (FALCON और GBI) ईरानी जलक्षेत्र से गुज़रते हैं
- कानूनी दावा आधा-सच है। समुद्री कानून संधि UNCLOS के तहत तटीय देश अपने प्रादेशिक जल में केबलों के लिए शर्तें तय कर सकता है, और ईरान इसी का हवाला देता है। पर ज़्यादातर देश परमिट व मंज़ूरी मांगते हैं, हर साल "टोल" नहीं
- अमेरिकी प्रतिबंध बड़ा पेच हैं। अमेरिकी कंपनियां ईरानी सरकारी संस्थाओं को भुगतान करना कानूनन नहीं कर सकतीं। यानी वे फीस दे नहीं सकतीं, और न देने पर ईरान की धमकी का खतरा बना रहता है
पहले भी बन चुका है डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर निशाना
रिपोर्ट्स के अनुसार इस जंग के दौरान ईरान ने खाड़ी के केबलों और क्लाउड ठिकानों का नक्शा प्रकाशित किया था, और उसी महीने UAE व बहरीन में अमेज़न वेब सर्विसेज़ की सुविधाओं पर ड्रोन हमले की रिपोर्ट्स आई थीं। इसलिए विश्लेषक इन धमकियों को हल्के में नहीं ले रहे।