एयरपोर्ट हमलों के बीच ईरान की सऊदी अरब से कूटनीति की अपील

तेहरान: ईरान ने सऊदी अरब से कहा है कि यमन में चल रहे संघर्ष को सैन्य ताकत से नहीं, बल्कि कूटनीति से सुलझाया जाए। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को अपने सऊदी समकक्ष प्रिंस फ़ैसल बिन फ़रहान अल सऊद से बात की और ईरान की ओर से सहयोग देने की पेशकश भी की। ईरान की इस सक्रिय कूटनीति ऐसे वक्त पर आई है जब रियाद के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर हमलों के बाद पूरे इलाके में तनाव तेज़ हो गया है।
अराघची ने साफ कहा कि इस क्षेत्र की अस्थिरता का कोई सैन्य हल नहीं है। उनका कहना था कि हथियारों के सहारे आगे बढ़ने से संकट और उलझेगा। ईरान का रुख यह है कि राजनीतिक समाधान के लिए बातचीत का माहौल बनाने में वह मदद करने को तैयार है।
रियाद एयरपोर्ट पर लगातार हमले
हालात की गंभीरता इन घटनाओं से समझी जा सकती है। 10 अक्टूबर 2026 को अंसार अल्लाह (हूती) के हमले में रियाद के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर 13 लोगों की मौत हुई और 300 से ज़्यादा लोग घायल हुए। इसके अगले दिन, 11 अक्टूबर को, उसी एयरपोर्ट पर फिर हमला हुआ, जिसमें कम से कम 12 लोगों की जान गई और 300 से अधिक लोग घायल हुए।
12 अक्टूबर तक सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने बताया कि किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के टर्मिनल 4 पर एक प्रोजेक्टाइल गिरा, जिससे आग लग गई। इसी बीच अंसार अल्लाह के सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने चेतावनी दी कि समूह की चेतावनियों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
जवाब में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन की राजधानी सना के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के ठिकानों पर हवाई हमले किए। सऊदी अरब ने रियाद, जेद्दा और यनबू में एयर रेड अलर्ट जारी किया है। अमेरिकी फ़ेडरल एविएशन एजेंसी (FAA) ने अमेरिकी एयरलाइनों को सऊदी हवाई क्षेत्र में सैन्य गतिविधि और नेविगेशन में बाधा को लेकर सावधान रहने को कहा है।
इन सबके बीच कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया