ईरान ने सऊदी अरब से अंसार अल्लाह के साथ बातचीत का आग्रह किया

तेहरान: ईरान और सऊदी अरब के बीच ईरान सऊदी अरब बातचीत की एक अहम कड़ी उस वक़्त जुड़ी, जब 12 अक्टूबर 2026 को ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सऊदी विदेश मंत्री फ़ैसल बिन फ़रहान से फ़ोन पर लंबी बात की। अराघची ने रियाद से कहा कि इलाक़े में बढ़ते तनाव का हल सिर्फ़ बंदूक़ से नहीं निकलेगा, और इसके लिए अंसार अल्लाह आंदोलन के साथ राजनीतिक संवाद शुरू करना होगा।
ईरान ने इस मामले में अपनी भूमिका की पेशकश भी की। अराघची ने कहा कि तेहरान एक राजनीतिक समाधान तक पहुँचने में मदद के लिए तैयार है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की कि दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय तनाव पर संपर्क हुआ है, लेकिन इस बातचीत में किसी नई पहल का ब्योरा नहीं दिया गया।
यह कूटनीतिक पहल ऐसे समय में आई है, जब इलाक़े में तीखी लड़ाई चल रही थी। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने 11 अक्टूबर को सऊदी ऊर्जा ढांचे और किंग ख़ालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमलों की ज़िम्मेदारी ली। इससे पहले 10 और 11 अक्टूबर को भी हमले हुए थे। इन हमलों में कम से कम 12 लोगों की मौत हुई और सैकड़ों लोग घायल हुए।
हूती चेतावनी और सऊदी जवाबी कार्रवाई
हूती विदेश मंत्रालय ने आगे की कार्रवाई की चेतावनी दी है। उसका दावा है कि पिछले 24 घंटों में सऊदी अरब ने 124 हवाई हमले किए। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने इन घटनाओं पर गहरी चिंता जताई और कहा कि तेहरान संवाद को आगे बढ़ाने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने को तैयार है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएँ बँटी हुई हैं। अरब लीग ने हूती हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बताया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वॉशिंगटन का हूती समूह से संपर्क है, लेकिन हालिया हिंसा को उन्होंने बहुत बुरा बताया और सऊदी अरब के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया। अमेरिकी दूतावास ने सऊदी अरब के भीतर संभावित हूती हमलों को लेकर चेतावनी जारी की है।
इसी बीच संयुक्त अरब अमीरात के कूटनीतिक सलाहकार अनवर गर्गाश ने ईरान और उसके सहयोगी समूहों के ख़िलाफ़ खाड़ी देशों की एकजुट कार्रवाई की वकालत की। वहीं, ईरान ने पाकिस्तान और तुर्की को चेताया है कि वे नए सक्रिय किए गए मक्का रक्षा समझौते का इस्तेमाल जवाबी हमलों के लिए न करें। पाकिस्तान ने सऊदी अरब की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, लेकिन साथ ही कूटनीतिक रास्तों को प्राथमिकता देने की बात कही।
इन घटनाओं से पहले सऊदी विदेश मंत्री फ़ैसल बिन फ़रहान ने एक शांति प्रस्ताव रखा था। इसमें सना हवाई अड्डे को फिर से खोलने, हुदैदा बंदरगाह से आयात की सुविधा देने और औपचारिक राजनीतिक