अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा, ईरान ने दुनिया से की अपील की अमेरिकी प्रतिबंधों को न माने.

ईरान के विदेश मंत्रालय ने दुनिया भर के देशों से औपचारिक तौर पर अपील की है कि वे अमेरिका की तरफ से लगाए गए प्रतिबंधों को बिल्कुल न मानें और उनका साथ न दें। ईरान का कहना है कि ये सारे प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हैं और इनसे आम लोगों की आर्थिक स्थिति खराब होती है। 28 अगस्त 2026 को इस बात की आधिकारिक जानकारी दी गई, जिससे तेहरान और वाशिंगटन के बीच चल रहा तनाव और ज्यादा बढ़ गया है। ईरान लगातार यह कह रहा है कि इस तरह के दबाव से उनकी नीतियों में कोई बदलाव नहीं आने वाला है और वे अपने हक के लिए मजबूती से खड़े रहेंगे।
कतर के साथ बैठक और कड़े तेवर
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने तेहरान में कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Sheikh Mohammed bin Abdulrahman Al Thani के साथ खास बातचीत की। इस मुलाकात के बाद उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि दबाव डालने से कुछ हासिल नहीं होने वाला है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अगर अमेरिका उनके संप्रभु अधिकारों को मान लेता है और अपनी पुरानी जिम्मेदारियों को पूरा करता है, तो दोनों देशों के बीच बातचीत का रास्ता फिर से खुल सकता है। इससे पहले विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी अपनी बात रखी थी और सभी देशों से अपील की थी कि वे अमेरिका के एकतरफा फैसलों के सामने झुकने के बजाये संयुक्त राष्ट्र के नियमों का पालन करें।
अमेरिका का कड़ा रुख और प्रतिबंध
दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 28 अगस्त को इन बातों का जवाब देते हुए कहा कि ईरान की अर्थव्यवस्था इस समय पूरी तरह से ढल रही है और वे खुद समझौते के लिए तैयार बैठे हैं। उन्होंने इस बात से साफ इनकार किया कि अमेरिका किसी भी तरह से बातचीत की पहल कर रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के सचिव Scott Besent ने ईरान पर दबाव और ज्यादा बढ़ाते हुए 60 नए लोगों, कंपनियों और जहाजों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर दी। साथ ही यह चेतावनी भी दी गई कि जो भी देश ईरान के साथ व्यापार जारी रखेगा, उसे डॉलर पर आधारित वैश्विक वित्तीय प्रणाली से बाहर किया जा सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य तनाव
खाड़ी देशों के पास समुद्र में भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। 28 अगस्त को अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर Brad Cooper ने जानकारी दी कि उन्होंने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्क्स द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में बिछाई गईमाइंस को सफलतापूर्वक हटा दिया है। उन्होंने बताया कि इस इलाके में समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखने के लिए लगभग 50,000 अमेरिकी सैनिक तैनात किए गए हैं। अगस्त के मध्य में नौसेना की नाकाबंदी दोबारा लागू होने के बाद से ईरान के लिए तेल का निर्यात करना पूरी तरह से बंद हो गया है, जिससे उनकी मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।
ईरान की जवाबी तैयारी और संयुक्त राष्ट्र से मांग
पूरे हफ्ते ईरान का रुख काफी कड़ा और आक्रामक बना रहा। 27 अगस्त को ईरान ने संयुक्त राष्ट्र के सामने एक औपचारिक आवेदन दिया, जिसमें अमेरिका और इस्राइल के प्रतिबंधों से हुए आर्थिक नुकसान के लिए मुआवजे की मांग की गई। इसके अलावा, 25 अगस्त को ईरान के अर्थव्यवस्था मंत्री Ali Madani Zadeh ने कहा कि उनका देश किसी भी तरह के आर्थिक युद्ध के लिए पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने दावा किया कि चीन और रूस ने अमेरिकी प्रतिबंधों को मानने से इनकार कर दिया है। ईरान के पहले उपराष्ट्रपति Mohammad Reza Arif ने भी इस दौर को देश की आजादी बचाने वाला एक कठिन सफर बताया है।