अमेरिका के साथ युद्ध खत्म करने के लिए ईरान मध्यस्थों से कर रहा बातचीत, 7 दिन का प्लान तैयार
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका के साथ युद्ध खत्म करने के लिए 7 दिन के प्लान और मध्यस्थों से बातचीत की बात कही है।

तेहरान: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए तेहरान मध्यस्थों के जरिए बातचीत कर रहा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि अगर जरूरी इंतजाम हो जाते हैं, तो इस योजना को एक हफ्ते से भी कम समय में लागू किया जा सकता है।
अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक बयान जारी कर कहा कि ईरान कूटनीतिक कोशिशों के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन साथ ही अपनी सैन्य तैयारी को भी उच्च स्तर पर रखे हुए है। उन्होंने लिखा कि जहां देश की बहादुर सशस्त्र सेनाएं मातृभूमि की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं, वहीं ईरान कूटनीति को सफल होने का मौका दे रहा है।
विदेश मंत्री ने आगे कहा कि वे मध्यस्थों के साथ लगातार संपर्क में हैं ताकि उन विचारों की समीक्षा की जा सके जो उनके 7-दिवसीय प्लान को एक हफ्ते से भी कम समय में लागू करना सुनिश्चित कर सकें।
इसी बीच अराघची ने चेतावनी दी है कि अगर इजरायल की अगुवाई में कोई सैन्य हमला होता है, तो अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर इसका गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने मॉस्को में गैस निर्यातक देशों के फोरम शिखर सम्मेलन के दौरान हुई चर्चाओं का जिक्र करते हुए कहा कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में इजरायल द्वारा उकसाए गए किसी भी सैन्य दुस्साहस का असर गैस आपूर्तिकर्ताओं और उपभोक्ताओं दोनों के लिए बड़ी चिंता का विषय है।
यह तनाव उस समय बढ़ रहा है जब प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व में इजरायल ने ईरानी प्रशासन को उखाड़ फेंकने का संकल्प लिया है। दोनों देशों के बीच दशकों की दुश्मनी के बाद पहली बार सीधा युद्ध छिड़ा है। इसकी शुरुआत फरवरी में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हवाई हमलों के बाद हुई थी।
मध्य पूर्व के इस संघर्ष और सर्दियों से पहले ईंधन के भंडार को फिर से भरने की जरूरत के कारण यूरोपीय प्राकृतिक गैस की कीमतें बढ़ गई हैं। बुधवार को डच TTF फ्यूचर्स 4 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 100.45 यूरो प्रति मेगावाट-घंटा तक पहुंच गए, जो 2022 के बाद का उच्चतम स्तर है। हालांकि, यह मार्च 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के समय पहुंचे 345 यूरो के रिकॉर्ड स्तर से काफी कम है।
बाजारों में यह डर है कि अमेरिका आगामी मध्यावधि चुनावों के बाद तेहरान पर नए हमले कर सकता है, जिससे खाड़ी क्षेत्र के महत्वपूर्ण ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है। वहीं इजरायल में हालिया चुनावी चक्र ने क्षेत्रीय संघर्ष की दिशा को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है।