ईरान पर अमेरिकी हमला, बासिज के 3 लड़ाकों और आईआरजीसी के 4 सैनिकों सहित 18 की मौत

ईरान के सामरिक और आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण लावन द्वीप पर एक दिन पहले हुए अमेरिकी हमलों में अर्धसैन्य बल बासिज के तीन लड़ाके मारे गए हैं। रातभर चले इन भीषण अमेरिकी हवाई हमलों में कम-से-कम 18 सैन्यकर्मी और आम नागरिक भी अपनी जान गंवा चुके हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य पूर्व के हालातों को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है, जिससे आम जनजीवन और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ा है।
अलजजीरा की रिपोर्ट और अलग-अलग जगहों पर नुकसान
अलजजीरा की रिपोर्ट में एक ईरानी अधिकारी के हवाले से यह जानकारी सामने आई है कि हमलों का दायरा केवल एक जगह तक सीमित नहीं था। कोहेस्तक में एक शादी की पार्टी के दौरान हुए हमले में चार लोग मारे गए, जबकि खुजेस्तान प्रांत में सात लोगों की जान चली गई। इसके अलावा केरमानशाह में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के चार सदस्य और लावन द्वीप पर बासिज के तीन लड़ाके मारे गए हैं। इन लगातार हो रहे हमलों से स्थानीय लोगों में काफी डर का माहौल बना हुआ है और हर कोई अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित है।
बासिज बल का इतिहास और उसकी भूमिका
आपको बता दें कि अर्धसैन्य बल बासिज पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी का सीधा नियंत्रण रहता है। इस संगठन में मुख्य रूप से आम नागरिकों को शामिल किया जाता है और एक अनुमान के मुताबिक इस बल में करीब 4,50,000 लड़ाके मौजूद हैं। इन लड़ाकों को अकसर देश में होने वाले विरोध प्रदर्शनों और आयोजनों के दौरान सबसे आगे तैनात किया जाता है। पिछले कुछ वर्षों में सरकार के खिलाफ हुए कई विद्रोहों और प्रदर्शनों को दबाने में इस बल ने एक बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। इसके अलावा मार्च 2026 में इजराइल की एक कार्रवाई में इस संगठन के प्रमुख कमांडर घोलमरेजा सोलेमाई को भी मार गिराया गया था।
स्थापना और आंतरिक सुरक्षा में कार्य
यह बल आईआरजीसी की कुल पांच शाखाओं में से एक प्रमुख शाखा है। इसकी स्थापना नवंबर 1979 में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खुमैनी ने की थी। साल 2009 के चुनावी प्रदर्शनों और हाल ही में चले 'महिला, जीवन, स्वतंत्रता' आंदोलनों को कड़ाई से कुचलने में इसकी बहुत क्रूर भूमिका देखी गई थी। यह बल सार्वजनिक स्थानों और विश्वविद्यालयों में इस्लामी ड्रेस कोड जैसे हिजाब और अन्य सख्त नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए एक नैतिक पुलिस के रूप में काम करता है। इसके साथ ही यह पूरे ईरानी समाज और शिक्षा व्यवस्था में कट्टरपंथी इस्लामी विचारधारा और मौलवी शासन को सही ठहराने के लिए अपना प्रचार तंत्र भी संभालता है।