अमेरिका और ईरान की जंग तेज़, जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर दागी मिसाइलें तो होर्मुज में 10 जहाजों को बनाया निशाना.

मध्य पूर्व में हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं और दोनों पक्षों के बीच तनाव अब खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। बुधवार, 9 सितंबर 2026 को ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर ताबड़तोड़ मिसाइल हमले किए। इस बड़े हमले से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और आम लोगों के साथ-साथ वहां काम करने वाले प्रवासियों की चिंता भी काफी बढ़ गई है। इस संघर्ष के बढ़ने से गल्फ देशों में रह रहे भारतीय कामगारों और उनके परिवारों के मन में भी सुरक्षा को लेकर डर बैठ गया है।
जॉर्डन और होर्मुज जलडमरूमध्य में बड़ा हमला
जॉर्डन की सेना से मिली जानकारी के मुताबिक, ईरान की तरफ से कुल 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं थीं, जिनमें से उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही 18 मिसाइलों को नाकाम कर दिया। बाकी की दो मिसाइलें ऐसी जगह पर गिरीं जहां कोई आबादी नहीं थी, जिससे किसी भी तरह का जानी नुकसान नहीं हुआ। इसके साथ ही अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने साफ किया कि इस हमले में अमेरिका का कोई भी सैनिक घायल नहीं हुआ और सभी सुरक्षित हैं। तेहरान ने इस कार्रवाई को एक सजा देने वाला ऑपरेशन बताया है। दूसरी तरफ, इसी दौरान होर्मुज के पास 10 जहाजों पर भी हमले की खबर आई, जिनमें अमेरिका के दो जहाज और आठ तेल टैंकर शामिल हैं। ईरान ने इस पूरे समुद्री इलाके को खतरनाक और प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित कर दिया है।
अमेरिका की कार्रवाई और ईरान का कड़ा रुख
यह पूरा विवाद एक दिन पहले यानी मंगलवार, 8 सितंबर 2026 को हुई अमेरिकी कार्रवाई के बाद और ज्यादा भड़क उठा। अमेरिकी सेना ने गल्फ ऑफ ओमान और खार्ग द्वीप के पास ईरान के 5 कच्चे तेल के जहाजों (जैसे एम/टी काविज, एम/टी चारमीनार, एम/टी होराइजन 1, एम/टी रिएस्को और एम/टी डेरिया) को पूरी तरह तबाह कर दिया था। अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत पर ईरान के दो असफल मिसाइल हमलों के बाद अमेरिका ने यह सख्त कदम उठाया था। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को साफ कह दिया था कि अगर ईरान ने उनके समुद्री जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश की, तो उसे अपने तेल टैंकरों से हाथ धोना पड़ेगा। इसके अलावा, ईरान ने 8 सितंबर को होर्मुज के पास अमेरिका का एक मानवरहित पानी के नीचे चलने वाला सबमर्सिबल भी अपने कब्जे में ले लिया, जिसे अमेरिका ने एक पुराना और खराब मॉडल बताया।
क्षेत्रीय तनाव और कूटनीतिक हलचल
ईरान के विदेश मंत्री عباس عراقچی (अब्बास अराघची) ने अमेरिका द्वारा नए प्रतिबंध लगाए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आर्थिक और सैन्य दोनों मोर्चों पर अपनी रणनीति पर लगातार काम कर रहे हैं। इस बढ़ते तनाव के बीच यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के शहरों पर भी हमले शुरू कर दिए हैं, जिससे अमेरिका का मुख्य सहयोगी देश भी इस लड़ाई के बीच में खिंचता चला आ रहा है। गल्फ देशों में हो रही इन घटनाओं से वहां रहने वाले लाखों प्रवासियों और भारत से आने-जाने वाले लोगों के लिए हालात मुश्किल होते जा रहे हैं। ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रजाई ने फारस की खाड़ी में जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाने की बात कही है, और IRGC ने कुवैत और बहरीन के बंदरगाहों पर खड़े तेल टैंकरों के क्रू मेंबर को तुरंत जहाज खाली करने की चेतावनी दी है।