Strait of Hormuz पर अमेरिका और ईरान आमने-सामने, जानिए क्या है होर्मुज जलडमरूमध्य का पूरा विवाद.

होरमुज़ जलडमरूमध्य में तनाव 29 अगस्त 2026 को उस समय और अधिक बढ़ गया जब व्हाइट हाउस और ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्स यानी IRGC ने इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को लेकर बिल्कुल आमने-सामने और एक-दूसरे से विरोधी बयान जारी किए। अमेरिकी प्रशासन ने साफ कहा कि यह जलमार्ग पूरी तरह से खुला हुआ है और यहाँ किसी भी प्रकार की कोई समुद्री खदान यानी सी माइन नहीं बची है।
व्हाइट हाउस और अमेरिकी सेना का पक्ष
व्हाइट हाउस की तरफ से यह जानकारी दी गई कि उनकी नौसेना की नाकाबंदी बेहद सक्रिय और पूरी तरह से प्रभावी है। White House Official Release के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर ब्रैडली कूपर ने इस बात की पुष्टि की कि अमेरिकी बलों ने IRGC द्वारा बिछाई गई समुद्री खदानों को सफलतापर्वक साफ कर दिया है। अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी बताया कि अमेरिकी सुरक्षा के दायरे में अब तक लगभग 1,500 कमर्शियल जहाजों ने इस क्षेत्र को पार किया है और इन जहाजों के जरिए कुल 75 करोड़ बैरल कच्चा तेल सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुंचाया गया है।
ईरान और IRGC का दावा
दूसरी तरफ, ईरान के IRGC ने 28 अगस्त 2026 को दावा किया कि इस जलडमरूमध्य पर उनका पूर्ण अधिकार और निर्णायक नियंत्रण बना हुआ है। ईरान ने अमेरिका के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें इस रास्ते को खुला होने की बात कही जा रही थी। IRGC के प्रवक्ता हुसैन मोहेब्बी ने पहले ही 27 अगस्त को संकेत दे दिया था कि जब तक अमेरिका ईरान की कुछ खास शर्तों को नहीं मानता है, तब तक यह रास्ता बिना अनुमति वाले जहाजों के लिए बंद ही रहेगा। इसके अलावा, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने 28 अगस्त को यह जानकारी दी कि तेहरान ने ओमान के साथ मिलकर इस रास्ते से गुजरने के लिए एक खास रूट तय कर लिया है। उन्होंने साफ कहा कि इस रास्ते को पूरी तरह से तब ही खोला जाएगा जब अमेरिका इस्लामाबाद समझौते के तहत अपनी सभी प्रतिबद्धताओं को पूरा करेगा। इन शर्तों में मुख्य रूप से ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाना, उनके फ्रीज किए गए पैसों को वापस देना और लेबनान में चल रहे युद्ध को समाप्त करना शामिल है।
तनाव के बीच कूटनीति और क्षेत्रीय असर
इस भयंकर तनाव के बावजूद व्हाइट हाउस ने यह साफ किया कि इस समय तेहरान के साथ किसी भी प्रकार की सीधी बातचीत न तो चल रही है और न ही कोई बैठक तय की गई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरानी नेतृत्व के साथ किसी भी तरह की मुलाकात की संभावना से साफ इंकार कर दिया है। इसके विपरीत, अमेरिका आर्थिक दबाव बनाने की नीति पर काम कर रहा है और इसके तहत उन्होंने 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' की शुरुआत की है, जिसके तहत हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE के एक बैंक पर नए प्रतिबंध भी लगाए गए हैं।
इस पूरे मामले पर ईरानी सांसद इस्माइल कौसारी ने 28 अगस्त को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अमेरिकी नौसेना की तरफ से घेराबंदी जारी रहती है, तो यह जलमार्ग बंद रहेगा और ईरान इस पर आक्रामक कदम भी उठा सकता है। इस बीच, यूनाइटेड किंगडम मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर यानी UKMTO ने जुलाई की शुरुआत से लेकर अब तक जहाजों पर कुल 23 प्रोजेक्टाइल हमलों की घटनाओं की रिपोर्ट दी है। UKMTO का यह भी कहना है कि इस क्षेत्रीय समुद्री यातायात की गति अभी भी सामान्य दिनों के मुकाबले काफी नीचे चल रही है, जिससे खाड़ी देशों में व्यापार और आवाजाही पर बुरा असर पड़ रहा है।