ईरान और अमेरिका में तनाव चरम पर, होर्मुज को लेकर ट्रंप ने ठुकराया शांति प्रस्ताव

Nura Basta27 September 20263 min read4 viewsWorld
ईरान और अमेरिका में तनाव चरम पर, होर्मुज को लेकर ट्रंप ने ठुकराया शांति प्रस्ताव

मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा गतिरोध अब आर-पार की स्थिति में दिखाई दे रहा है। ईरान की सेना ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यह टकराव अब एक बेहद निर्णायक दौर में पहुंच चुका है। वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने ईरान के बातचीत और शांति के ताजा प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है, जिससे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

ईरान के सेना प्रमुख का बड़ा बयान

ईरान के सेना प्रमुख Major-General Amir Hatami ने 27 सितंबर 2026 को बयान देते हुए कहा कि अमेरिका और इसराइल के साथ चल रहा संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है, बल्कि यह अपने सबसे नाजुक और अहम पड़ाव पर आ चुका है। उन्होंने कहा कि ईरान ने अब तक कई मोर्चों पर अपनी बढ़त बनाई है और देश इन जीतों की पूरी मजबूती से रक्षा करेगा। जनरल हातातमी ने साफ किया कि अगर आक्रामक रुख नहीं बदला तो दुश्मन को आने वाले दिनों में और भी बड़े झटके झेलने पड़ेंगे।

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ईरानी सेना प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि पूरे मिडिल ईस्ट की सुरक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ इस इलाके के देशों की होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इलाके में अमन-चैन बनाए रखने के लिए अमेरिका और इसराइल की सैन्य मौजूदगी का पूरी तरह हटना जरूरी है। Strait of Hormuz यानी होर्मुज जलडमरूमध्य का जिक्र करते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि यह जलमार्ग ईरान के सम्मान और अस्तित्व से जुड़ा है। अगर ईरान को शांति से व्यापार करने या रहने नहीं दिया गया, तो इलाके में कोई दूसरा भी चैन से नहीं रह सकेगा।

ट्रंप ने ठुकराया ईरान का 7 दिनों वाला प्रस्ताव

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान की तरफ से आए 7 दिन के उस प्रस्ताव को आधिकारिक तौर पर खारिज कर दिया है, जिसमें होर्मुज जलमार्ग को पूरी तरह खोलने और परमाणु समझौते पर दोबारा बातचीत शुरू करने की पेशकश की गई थी। ट्रंप ने दावा किया कि होर्मुज जलमार्ग पर इस समय अमेरिका का पूरा नियंत्रण बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी संकेत दिया कि ईरान इस समय भारी आर्थिक दबाव में है और आने वाले नवंबर के चुनावों के बाद बमबारी की कार्रवाई दोबारा शुरू की जा सकती है।

अमेरिका के वित्त मंत्री Scott Bessent ने भी इन दावों का समर्थन किया और कहा कि ईरान पर लगाई गई आर्थिक पाबंदियां रंग ला रही हैं। उन्होंने बताया कि Turkey, Oman और UAE जैसे देशों ने ईरान से जुड़े वित्तीय लेन-देन और उड़ानों पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। उधर नाटो में अमेरिकी राजदूत Matthew Whitaker ने भी ईरान के शांति प्रस्ताव को अधूरा और छलावा बताते हुए पूरी तरह खारिज कर दिया।

ईरान की सेना और कूटनीतिक तंत्र का रुख

अमेरिकी बयानों के बाद ईरान की सशस्त्र सेना के प्रवक्ता Mohammad Akraminia ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि उनकी सेना अमेरिका के किसी भी नए हमले का सामना करने के लिए तैयार है। उन्होंने वाशिंगटन को आगाह किया कि अगर कोई हिमाकत हुई, तो अमेरिका को पिछले टकरावों से भी ज्यादा भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। सेना के एक अन्य प्रवक्ता Abolfazl Shekarchi ने खाड़ी के अरब देशों को सलाह दी कि वे अमेरिका के भरोसे न रहें और होर्मुज में किसी भी दखलंदाजी का बेहद कड़ा जवाब दिया जाएगा।

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने स्पष्ट किया कि तेहरान मध्यस्थ देशों Qatar और Oman के जरिए अमेरिका के अंतिम और आधिकारिक जवाब का इंतजार कर रहा है। उन्होंने साफ कर दिया कि बातचीत अपनी जगह है, लेकिन ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी भी दबाव में झुकने या कोई छूट देने के मूड में नहीं है।

राजधानी तेहरान में हाई अलर्ट

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने उड़ानों पर लगे प्रतिबंधों के खिलाफ किसी तरह के सैन्य कदम से इनकार करते हुए कहा है कि वे फिलहाल बातचीत के जरिए हल तलाशने के पक्ष में हैं। हालांकि जमीन पर सतर्कता बढ़ा दी गई है। ग्रेटर तेहरान में सभी सुरक्षाबलों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं और उन्हें हाई अलर्ट पर रखा गया है। इसी बीच सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने रियाद की तरफ दागे गए ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के 2 ड्रोन को हवा में ही मार गिराने की पुष्टि की है।

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