ईरान-अमेरिका समझौता अनिश्चित, होर्मुज पर तनाव बढ़ा

तेहरान: ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत से किसी ठोस समझौते की उम्मीद फिलहाल धुंधली होती दिख रही है। 11 अक्टूबर 2026 को ईरान की सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेजाई ने ईरान-अमेरिका समझौते की संभावना को "अनिश्चित" बताया। उन्होंने साफ कहा कि होर्मुज जलमार्ग खोलने के लिए ईरान की सात शर्तों पर अमेरिका का जवाब पर्याप्त नहीं है।
रेजाई सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव हैं। उनके मुताबिक ईरान ने यह प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान रखा था। प्रस्ताव में कहा गया था कि अगर उसकी शर्तें मान ली जाती हैं, तो वह सात दिनों के भीतर होर्मुज को फिर से खोल सकता है। अमेरिका ने कतर के मध्यस्थों के जरिए अपना जवाब भेजा, लेकिन रेजाई के अनुसार उसमें कुछ बातें अस्पष्ट हैं। इसी वजह से ईरान अब अमेरिका के जवाब पर और बातचीत करने की स्थिति में नहीं है।
बात सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं रही। रेजाई ने चेतावनी दी कि अगर फिर से लड़ाई शुरू होती है, तो ईरान क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाएगा। उन्होंने खास तौर पर संचार केबल, डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी सुविधाओं का जिक्र किया। इससे साफ है कि अगर टकराव बढ़ा, तो उसका असर सिर्फ सैन्य मोर्चे तक नहीं रहेगा।
ट्रंप का इनकार और वेंस की शर्तें
उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सितंबर के अंत में ईरान के ताज़ा प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी है कि मध्यावधि चुनाव के बाद संघर्ष और तेज़ हो सकता है। उनका कहना है कि यह युद्ध "किसी न किसी तरह" खत्म होगा, और उन्होंने ईरान से सब कुछ देने की मांग की है। ट्रंप की चेतावनी में यह भी संकेत है कि ईरान के सामने अस्तित्व से जुड़ा खतरा भी हो सकता है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने 6 और 7 अक्टूबर 2026 के आसपास दिए बयानों में यूरेनियम संवर्धन क्षमता में "उल्लेखनीय" कटौती को युद्ध खत्म करने की पहली शर्त बताया था। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ईरान परमाणु हथियार बनाने का इरादा नहीं रखता, तो उसे 60 प्रतिशत तक संवर्धित ईंधन रखने की ज़रूरत क्यों है। वेंस ने यह भी कहा कि तेहरान में फैसले किस तरह होते हैं, यह साफ नहीं है, जिससे बातचीत और मुश्किल हो जाती है।