अमेरिकी दूतावास कब्जे की 47वीं वर्षगांठ पर ईरान में भारी प्रदर्शन, अमेरिका-इजरायल के खिलाफ फूटा गुस्सा
ईरान के 900 से अधिक स्थानों पर हजारों लोगों ने अमेरिकी दूतावास कब्जे की 47वीं वर्षगांठ मनाई। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारेबाजी की।

तेहरान: ईरान में 4 नवंबर, 2026 को अमेरिकी दूतावास कब्जे की 47वीं वर्षगांठ के मौके पर हजारों समर्थक सड़कों पर उतरे। राजधानी तेहरान समेत देश के 900 से ज्यादा इलाकों में लोगों ने इस दिन को 'ग्लोबल एरोगेंस के खिलाफ राष्ट्रीय दिवस' और 'छात्र दिवस' के रूप में मनाया। यह प्रदर्शन उस ऐतिहासिक घटना की याद में किया गया जब 1979 में अमेरिकी दूतावास पर कब्जा कर 52 अमेरिकियों को 444 दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया था।
तेहरान में प्रदर्शनकारी फिलिस्तीन स्क्वायर से पूर्व अमेरिकी दूतावास की ओर marched करते हुए नजर आए। इस दौरान भीड़ ने अमेरिका और इजरायल के झंडे जलाए और "डेथ टू अमेरिका" व "डेथ टू इजरायल" के नारे लगाए। प्रदर्शन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पुतले और कैरिकेचर भी दिखाए गए।
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब ईरान और अमेरिका-इजरायल गठबंधन के बीच सीधी जंग जारी है। यह युद्ध 28 फरवरी, 2026 को शुरू हुआ था, जिसने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को प्रभावित किया है। इसी साल फरवरी में पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की भी मृत्यु हो गई थी।
भीड़ को संबोधित करते हुए तेहरान के मेयर अलीरेजा ज़कानी ने दावा किया कि अमेरिका और इजरायल को "निर्णायक हार" का सामना करना पड़ा है। उन्होंने इस हार को हाल ही में हुए अमेरिकी कांग्रेस के मध्यावधि चुनावों से जोड़ा। वहीं, सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई ने सोशल मीडिया के जरिए कहा कि जो लोग अमेरिकी राजनीतिक बदलावों से ईरान के प्रति दुश्मनी कम होने की उम्मीद कर रहे हैं, वे "भारी गलती" पर हैं।
न्यायिक प्रमुख गुलाम हुसैन मोहसेनी एजेही ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप "युद्ध और राजनीति दोनों में विफल" रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में और भी हार सामने आएंगी।
सैन्य मोर्चे पर तनाव लगातार बढ़ रहा है, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में। यहां ईरानी हमलों में टैंकरों के निशाने पर होने और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा अमेरिकी ड्रोन गिराए जाने की खबरें आई हैं। इससे पहले 2 नवंबर को अमेरिका ने क़ेशम द्वीप पर ईरान की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल बैटरियों पर हमले किए थे।
ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागर कालिबाफ ने 3 नवंबर को कहा कि ईरान ने "दृढ़ और तर्कसंगत प्रतिक्रिया" दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब आगे युद्ध रोकने की जिम्मेदारी वाशिंगटन पर है।