अमेरिका और इसराइल के हमले के छह महीने बाद, ईरान पर बढ़ा आर्थिक दबाव और क्षेत्रीय राजनीति में बड़े बदलाव.

अमेरिका और इसराइल द्वारा शुरू किए गए सैन्य अभियान 'Operation Epic Fury' को छह महीने पूरे हो चुके हैं। इस सैन्य अभियान के तहत 28 फरवरी 2026 को सिर्फ 12 घंटों के भीतर ईरान पर लगभग 900 हमले किए गए थे। इस बड़े हमले का मुख्य उद्देश्य ईरान की मिसाइल क्षमताओं, वायु रक्षा प्रणालियों और सैन्य बुनियादी ढांचे को नष्ट करना था। इस सैन्य कार्रवाई में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और दर्जनों अन्य अधिकारियों की मौत हो गई थी। इसके बाद 1 मार्च 2026 को ईरानी सरकार ने सर्वोच्च नेता की मौत की आधिकारिक पुष्टि की और देश में 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की। बाद में 8 मार्च 2026 को मोजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया।
शोक सभाएं और पाकिस्तान की मध्यस्थता से संघर्ष विराम
सर्वोच्च नेता और उनके परिवार के सदस्यों के लिए एक बड़ा राजकीय अंतिम संस्कार 3 जुलाई से 9 जुलाई 2026 के बीच तेहरान, कोम, मशहद, नजफ और करबला में आयोजित किया गया था। इस दौरान क्षेत्रीय हालात को शांत करने के लिए पाकिस्तान की मध्यस्थता से एक संघर्ष विराम और समझौता ज्ञापन यानी एमओयू पर सहमति बनी थी, जिसने जून 2026 में बड़े पैमाने पर हो रही लड़ाई को कुछ समय के लिए रोक दिया था। हालांकि इस समझौते के बावजूद दोनों देशों की तरफ से बाद में फिर से जवाबी हमले किए गए। अल जजीरा के पत्रकार ओसामा बिन जावेद की रिपोर्ट के मुताबिक 28 अगस्त 2026 तक ईरान भले ही पूरी तरह काम कर रहा है, लेकिन देश के लिए अस्तित्व बचाए रखना बहुत महंगा हो गया है और अब यह युद्ध मुख्य रूप से आर्थिक दबाव पर केंद्रित हो चुका है।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा समझौते
मध्य पूर्व की बदलती स्थिति के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास बहुत जटिल बने हुए हैं। इसी क्रम में 7 अगस्त 2026 को सऊदी अरब और तुर्की ने एक आपसी रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसे क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। दूसरी ओर, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव करोलीन लेविट ने 27 अगस्त 2026 को यह स्पष्ट किया कि इस समय कोई भी बातचीत नहीं चल रही है और अमेरिकी प्रशासन तब तक इंतजार करेगा जब तक ईरान किसी सार्थक तरीके से बातचीत की मेज पर नहीं आ जाता। यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उस ऐलान के बाद आया है जो उन्होंने 1 मार्च 2026 को सर्वोच्च नेता की मौत के बाद दिया था और मध्य पूर्व तथा दुनिया भर में शांति स्थापित करने की अपनी मंशा जताई थी।
विशेषज्ञों की राय और होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा
विभिन्न विशेषज्ञ इस सैन्य अभियान की सफलता को लेकर अपनी अलग-अलग राय रख रहे हैं। काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के विश्लेषकों ने 'Operation Epic Fury' को एक रणनीतिक भूल करार दिया है जो होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने में नाकाम रही और जिसकी वजह से ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को और अधिक उन्नत बनाने की प्रेरणा मिली। किंग्स कॉलेज लंदन के सीनियर फेलो नवाफ ओबैद ने 8 अगस्त 2026 को कहा कि इस युद्ध ने 'पोस्ट-अमेरिकन मिडिल ईस्ट' की तरफ बढ़ने की प्रक्रिया को और तेज कर दिया है। इसके अलावा अकादमिक विशेषज्ञ महोब जुएरी ने 28 अगस्त 2026 को बताया कि वर्तमान आर्थिक दबाव ईरान की स्थिरता और आंतरिक नेतृत्व की एकजुटता की कड़ी परीक्षा ले रहे हैं। अगस्त के आखिर में स्विट्जरलैंड में चल रही उच्च स्तरीय बैठकों के जरिए मौजूदा समझौते के ढांचे को मजबूत करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के प्रयास किए जा रहे हैं, जो वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है।