अमेरिका और ईरान के बीच गहराया तनाव, समुद्री नाकाबंदी पर IRGC का बड़ा दावा.

Praggya Singh sabal6 September 20264 min read27 viewsWorld
अमेरिका और ईरान के बीच गहराया तनाव, समुद्री नाकाबंदी पर IRGC का बड़ा दावा.

फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में अमेरिका और ईरान के बीच हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। 6 सितंबर 2026 को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि अमेरिका की तरफ से जो आर्थिक और समुद्री नाकाबंदी ईरान पर लगाई जा रही है, उससे तेहरान से ज्यादा आर्थिक नुकसान खुद वाशिंगटन को उठाना पड़ सकता है। इस पूरे मामले को लेकर दोनों देशों के बीच जुबानी जंग के साथ-साथ जमीनी स्तर पर भी टकराव बढ़ गया है, जिसका असर अब आम अंतरराष्ट्रीय बाजार और व्यापार पर भी साफ दिखने लगा है।

ईरान और अमेरिका के बीच समुद्री संघर्ष

आईआरजीसी के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल होसैन मोहिबी ने महर न्यूज एजेंसी को दिए अपने बयान में स्पष्ट किया कि अमेरिका ईरान को जितना आर्थिक नुकसान पहुँचाने की कोशिश कर रहा है, उससे कई गुना ज्यादा नुकसान अमेरिका को अपने भारी राष्ट्रीय कर्ज, चीन के साथ चल रही कड़ी आर्थिक प्रतिस्पर्धा और ऊर्जा बाजारों में फैल रही अस्थिरता के कारण उठाना पड़ेगा। इस बढ़ते दबाव का असर अमेरिका के रणनीतिक रिजर्व के साथ-साथ घरेलू एल्युमिनियम उत्पादन और निर्यात पर भी देखने को मिल रहा है। अमेरिका के वित्त विभाग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस नाकाबंदी से जुड़ी नीतियां लगातार लागू की जा रही हैं, जिसकी अधिक जानकारी आप यहाँ देख सकते हैं

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यह तनाव उस समय और ज्यादा बढ़ गया जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने फारस की खाड़ी में ईरान के तीन तेल टैंकरों को पूरी तरह से नाकाम करने की घोषणा कर दी। यह कार्रवाई एक ऐसे समय में सामने आई जब आईआरजीसी ने कथित तौर पर एक अमेरिकी विमान वाहक पोत और गाइडेड-मिशाइल विध्वंसक पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं। गनीमत यह रही कि इस हमले में किसी भी अमेरिकी सैनिक को चोट नहीं आई और ना ही किसी युद्धपोत को कोई नुकसान पहुँचा। सेंटकॉम के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने तेल टैंकरों को नष्ट करने की कार्रवाई को तेहरान पर भारी आर्थिक लागत थोपने के लिए एक जरूरी कदम बताया है। वहीं दूसरी ओर अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिकी जहाजों पर ईरान की तरफ से आगे कोई भी हमला होता है, तो उनके तेल टैंकरों को डुबो दिया जाएगा और नष्ट कर दिया जाएगा।

व्यापार और तेल निर्यात में भारी गिरावट

अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने प्रशासन की तरफ से लगाए जा रहे कड़े प्रतिबंधों को पूरी तरह से सही ठहराया है। उनका दावा है कि जब से यह समुद्री नाकाबंदी फिर से शुरू हुई है, तब से ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते चीन को कच्चे तेल की खेप भेजने में पूरी तरह असमर्थ रहा है। सेंटकॉम द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक 5 सितंबर 2026 तक अमेरिकी बलों ने 2 जहाजों पर कब्जा किया है, 3 को नाकाम किया है और 87 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदला है। शहीद राजाई और इमाम खुमैनी जैसे प्रमुख बंदरगाहों की सैटेलाइट तस्वीरों से यह बात बिल्कुल साफ हो जाती है कि जुलाई के मध्य से समुद्री शिपिंग गतिविधियों में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

ईरान का कुल व्यापार लगभग 35 प्रतिशत तक गिर चुका है। संघर्ष शुरू होने से पहले जहाँ ईरान हर दिन करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल निर्यात करता था, वहीं अगस्त के महीने में यह गिरकर मात्र 220,000 से 255,000 बैरल प्रतिदिन पर आ गया है। इस भारी गिरावट के चलते ईरान के खुले बाजार में अमेरिकी डॉलर का एक्सचेंज रेट अब 28 लाख रियाल को पार कर चुका है, जिससे आम जनता की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।

ईरान की तीखी प्रतिक्रिया

इस पूरी नाकाबंदी और हमलों के जवाब में ईरानी विदेश मंत्रालय ने तेल टैंकरों पर हुए हमलों को एक युद्ध अपराध करार दिया है और इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का खुला उल्लंघन बताया है। ईरान की सेना के चीफ ऑफ स्टाफ और कोऑर्डिनेटिंग डिप्टी हबीबollah सयारी ने अमेरिकी सैन्य क्षमता पर सवाल उठाते हुए कहा कि अमेरिका में अब वह ताकत नहीं बची है कि वह ईरान के खिलाफ वैसा कदम उठा सके जैसा उसने पहले वेनेजुएला के खिलाफ उठाया था। उन्होंने ईरानी जनता के मजबूत हौसले की तारीफ की। हालांकि इन सबके बीच ईरान के अंदर भी इस बात को लेकर राजनीतिक बहस छिड़ी हुई है कि क्या रणनीतिक फायदे के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य का इस्तेमाल करना सही है, क्योंकि इस नीति की वजह से देश के भीतर महंगाई आसमान छू रही है और व्यापार पर बहुत कड़े प्रतिबंध लग गए हैं।

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