Kuwait और Middle East में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष तेज, एयर डिफेंस सिस्टम को लेकर हुआ बड़ा दावा

मध्य पूर्व एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और हाल ही में 3 सितंबर 2026 को ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य हमलों का नया दौर देखने को मिला। ईरानी समाचार एजेंसी IRNA ने दावा किया कि उनके देश के आर्मी ड्रोन्स ने अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह से नाकाम कर दिया है। हालांकि, अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। इस पूरे घटनाक्रम ने खाड़ी देशों में रह रहे आम नागरिकों और प्रवासियों की चिंता बढ़ा दी है, जो शांति की उम्मीद कर रहे थे।
अमेरिका और सहयोगियों का बयान
एक अमेरिकी अधिकारी ने 3 सितंबर को यह साफ किया कि मध्य क्षेत्र यानी मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेना के किसी भी सैन्य ठिकाने को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। ईरान की तरफ से यह मिसाइल और ड्रोन हमले 3 सितंबर को कुवैत, बहरीन, जॉर्डन और इराक में मौजूद अमेरिकी सेना को निशाना बनाने के लिए किए गए थे। यह हमले अमेरिका द्वारा 1 और 2 सितंबर को किए गए हमलों के जवाब में किए गए थे। कुवैत के सैन्य अधिकारियों ने बताया कि उनके डिफेंस सिस्टम ने आने वाले सभी खतरों को हवा में ही रोक लिया। इसी तरह के बयान बहरीन और जॉर्डन के अधिकारियों की तरफ से भी सामने आए हैं, जिसमें सफल इंटरसेप्शन की बात कही गई है।
ईरान के दावे और जमीनी हकीकत
इन सबके बावजूद, ईरानी सेना ने दावा किया कि उन्होंने कुवैत के Ahmed Al-Jaber Air Base पर अमेरिकी सैटेलाइट इंस्टॉलेशन, वेयरहाउस और फाइटर जेट हैंगर को निशाना बनाया है। उनका यह भी कहना था कि इस हमले से संचार और विमान प्रणालियों को काफी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने बयान दिया कि उन्होंने Ali Al Salem Air Base पर अमेरिकी कमांडर के मुख्यालय और आवास को भी टारगेट किया था। दूसरी तरफ, अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने 1 और 2 सितंबर को IRGC के एयर-डिफ़ेंस और रडार सिस्टम, नौसैनिक संपत्तियों और संचार साइटों पर हमले किए थे। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 3 सितंबर को कहा कि अमेरिका ने उन्हें बहुत करारा जवाब दिया है और वे आगे भी ऐसे कदम उठाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने ईरान की इस जवाबी कार्रवाई को महज एक हल्का हमला बताया।
नुकसान और हताहतों पर विवाद
इस संघर्ष के बीच जानमाल के नुकसान को लेकर भी काफी विवाद खड़ा हो गया है। ईरान की तरफ से कहा गया कि अमेरिकी हमलों में कई सैन्य कर्मियों और आम नागरिकों की जान गई है, और उनका यह भी आरोप था कि एक शादी समारोह को भी निशाना बनाया गया। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने इन दावों पर शक जताया है और अमेरिकी सेना इस पूरे मामले की जांच कर रही है। संयुक्त राष्ट्र यानी UN के महासचिव António Guterres ने नागरिकों के हताहत होने की खबरों पर गहरी चिंता जताई है और सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय मानवीय नियमों का पालन करने की अपील की है। इस अस्थिर माहौल को देखते हुए अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सेना की तैनाती को बढ़ाकर 2027 तक करने का फैसला किया है, जो उनकी लंबी सैन्य रणनीति का हिस्सा है।