अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा तनाव, जनरल ने दी चेतावनी और देश भर में सुरक्षा सख्त

अमेरिका और ईरान के रिश्तों में एक बार फिर से बहुत बड़ी खटास आ गई है। 27 सितंबर 2026 को ईरानी सेना ने अमेरिका की तरफ से नए हमलों की आशंका को लेकर बहुत बड़ी चेतावनी जारी की है। इस पूरे मामले को लेकर आम लोगों और खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों के बीच भी चिंता का माहौल बन गया है। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक कोशिशें पूरी तरह से रुकी हुई हैं और हालात किसी भी समय बिगड़ सकते हैं।
ईरान की सैन्य चेतावनी और होर्मुज जलडमरूमध्य का विवाद
ईरानी सशस्त्र बलों के वरिष्ठ प्रवक्ता जनरल अब्दोलफजल शेकारची ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की दखलंदाजी की, तो उसे बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह जलमार्ग पूरी तरह से ईरान के नियंत्रण में है। इसके अलावा, आईआरजीसी नेवी के डिप्टी पॉलिटिकल कमांडर अली मोहम्मदी ने चेतावनी दी कि अगर कोई संघर्ष शुरू हुआ, तो हिंद महासागर में मौजूद अमेरिकी नौसेना के जहाजों को सीधा सैन्य निशाना बनाया जाएगा। यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरान के सात दिन के प्रस्ताव को सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया। ईरान ने अपने प्रस्ताव में परमाणु समझौते को फिर से शुरू करने और होर्मुज जलमार्ग को खोलने की बात कही थी, जिसके बदले में उसने नौसेब नाकाबंदी हटाने और तेल प्रतिबंधों से राहत मांगी थी। लेबनान में युद्धविराम की मांग भी इस प्रस्ताव का हिस्सा थी। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस पेशकश को यह कहते हुए ठुकरा दिया कि वित्तीय दबाव की वजह से ईरान समझौता करने के लिए मजबूर हो रहा है और किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार नहीं रखने दिए जाएंगे। इसके साथ ही, द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने सहयोगियों को संकेत दिया है कि नवंबर के मध्यावधि चुनावों के बाद बमबारी के अभियानों को फिर से शुरू किया जा सकता है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और ईरान का संयुक्त राष्ट्र में विरोध
इस खतरनाक माहौल को देखते हुए ईरान ने अपनी पूरी सेना और सुरक्षा तंत्र को हाई अलर्ट पर रख दिया है। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 27 सितंबर की आधी रात तक सभी कर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं, जिसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है। सिर्फ ग्रेटर तेहरान में ही 51,000 सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके। दूसरी तरफ, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत और चार्ज डी अफेयर्स गुलाम हुसैन दर्जी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव और सुरक्षा परिषद के सामने आधिकारिक तौर पर शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी अभियानों के लिए यूरोपीय सैन्य अड्डों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है।
क्षेत्रीय कूटनीति और क्षेत्रीय देशों की प्रतिक्रिया
इस पूरे संकट के बीच कूटनीतिक रास्ते लगभग बंद नजर आ रहे हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का कहना है कि इस संकट का हल सिर्फ बातचीत के जरिए ही निकल सकता है, लेकिन अभी वे मध्यस्थों के जरिए अमेरिका की तरफ से किसी साफ जवाब का इंतजार कर रहे हैं। इस बीच व्यापक क्षेत्र में ओमान के विदेश मंत्री सय्यद बद्र बिन हमद बिन हमूद अलबुसैदी ने सभी पक्षों से संयम बरतने और नेविगेशन की स्वतंत्रता की गारंटी देने की अपील की है। वहीं दूसरी तरफ, सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने रियाद की तरफ दागे गए ईरान समर्थित हौथी विद्रोहियों के दो ड्रोनों को हवा में ही नाकाम करने की सूचना दी है। खाड़ी देशों में चल रहे इन घटनाक्रमों पर वहां काम करने वाले भारतीय प्रवासियों की भी पैनी नजर है, क्योंकि किसी भी बड़े युद्ध या तनाव का सीधा असर मध्य पूर्व की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।