परमाणु मुद्दा सिर्फ एक बहाना है और अमेरिका असल में ईरान की विचारधारा के खिलाफ है, विदेश मंत्री अरघची ने कहा

तेहरान (ईरान): ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरघची ने कहा है कि परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका के साथ चल रहा विवाद सिर्फ एक बहाना है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका असल में ईरान की उस विचारधारा का विरोध करता है जो मध्य पूर्व में अमेरिकी दबदबे को स्वीकार नहीं करती।
इराक के अल-इखबरिया नेटवर्क को दिए इंटरव्यू में अरघची ने बताया कि अमेरिका ईरान के नजरिए को पूरी तरह खारिज करता है। उन्होंने कहा कि ईरान अमेरिकी ताकत के सामने झुकने के बजाय उसका मुकाबला करने में विश्वास रखता है और इसी सोच की वजह से क्षेत्र में प्रतिरोध की भावना पैदा हुई है।
राजनयिक समझौतों पर बात करते हुए अरघची ने कहा कि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समझौतों की सभी शर्तों को पूरा किया था। पूरी दुनिया ने परमाणु मुद्दे पर हुए समझौते का स्वागत किया था, लेकिन अमेरिका बिना किसी ठोस सबूत या कारण के एकतरफा तौर पर इस समझौते से बाहर निकल गया। उन्होंने कहा कि ऐसा ही अनुभव इस्लामाबाद में भी रहा।
अमेरिकी आक्रमण की आशंका पर अरघची ने कहा कि अमेरिका अच्छी तरह जानता है कि युद्ध के जरिए वह अपने लक्ष्यों को हासिल नहीं कर सकता। उन्होंने दावा किया कि ईरान की पूरी सैन्य तैयारी ही वह मुख्य वजह है जिसने अमेरिका को नया युद्ध शुरू करने से रोक रखा है।
दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने केंटकी में एक रैली के दौरान भरोसा जताया कि ईरान के साथ चल रहा युद्ध बहुत जल्दी खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा कि ईरान को कभी परमाणु हथियार नहीं मिलेंगे। ट्रंप ने दावा किया कि जब यह युद्ध खत्म होगा, तो ईंधन की कीमतें पहले से काफी कम हो जाएंगी।
ट्रंप ने ईरान के खिलाफ किए गए पिछले सैन्य हमलों का बचाव करते हुए कहा कि ये कदम ईरान की परमाणु क्षमताओं को खत्म करने के लिए जरूरी थे। उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है क्योंकि वे इनका इस्तेमाल कर सकते हैं।
इस बीच, ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने कहा कि क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए सभी मोर्चों पर लड़ाई खत्म होना जरूरी है। उन्होंने बताया कि ईरान अपने शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) और अमेरिका के सवालों के जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने जिक्र किया कि IAEA की 15 से ज्यादा रिपोर्टों ने ईरान के नियमों के पालन की पुष्टि की है।
यह पूरा विवाद जून में हस्ताक्षरित 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) के कार्यान्वयन को लेकर बढ़ी तनाव के बीच सामने आया है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच शत्रुता को समाप्त करना था।