होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा और दोनों देशों ने एक-दूसरे पर कड़े आरोप लगाए

तेहरान/वॉशिंगटन: ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी व्यावसायिक जहाजों के लिए बंद करने का ऐलान किया है। इस फैसले के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। ईरानी सरकारी अधिकारी डिप्टी सयारी ने साफ किया है कि जो भी जहाज बिना तालमेल के यहां से गुजरने की कोशिश करेगा, उसे अंजाम भुगतना होगा।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ संघर्ष में निर्णायक जीत हासिल कर ली है और उसके परमाणु बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया है। वेंस के मुताबिक, अब वॉशिंगटन को तेहरान से एक लंबी अवधि की और सत्यापित प्रतिबद्धता चाहिए ताकि परमाणु कार्यक्रम को दोबारा शुरू होने से रोका जा सके। उन्होंने ईंधन की कीमतों में हो रहे उतार-चढ़ाव का सीधा संबंध होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने से जोड़ा है।
रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने भी कहा कि ईरान को अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाएं छोड़नी होंगी और बातचीत के जरिए समाधान स्वीकार करना होगा, वरना उसे और सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिकी सैन्य ताकत ही विरोधियों को बातचीत की मेज पर लाने का मुख्य जरिया है।
दूसरी ओर, ईरान का नजरिया अलग है। विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान जिम्मेदारी के साथ कूटनीति की ओर बढ़ रहा है, लेकिन अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में नाकाम रहा है। उन्होंने इसके लिए इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (MoU) के टूटने का हवाला दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाएई ने बताया कि अमेरिका के पिछले शांति प्रस्ताव अपर्याप्त थे।
तेहरान का कहना है कि वह जून 2026 के इस्लामाबाद समझौते के मापदंडों पर वापस लौटने का समर्थन करता है। ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे दबाव में आकर अपने संप्रभु अधिकारों का त्याग नहीं करेंगे, हालांकि वे विश्वसनीय गारंटी के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं।
दोनों देशों के बीच जुलाई 2026 से जवाबी हमलों का दौर जारी है। इससे पहले कतर और पाकिस्तान के अधिकारियों ने मध्यस्थता की कोशिश की थी, लेकिन वे नाकाम रहे। अब दोनों ही देश एक-दूसरे पर जून 2026 के समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगा रहे हैं।