Strait of Hormuz: ईरान और अमेरिका के बीच समझौता करीब, पर 'क्रम' ने फंसाया पेंच

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक, Strait of Hormuz को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत में एक नया मोड़ आया है। कतरी मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका ने ईरान के सात दिवसीय प्रस्ताव पर अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया भेज दी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने बुधवार को राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन की कैबिनेट के सामने इस महत्वपूर्ण दस्तावेज को पेश किया। हालांकि दोनों पक्ष समझौते के मुख्य बिंदुओं पर सहमत दिख रहे हैं, लेकिन एक छोटी सी तकनीकी उलझन ने पूरे मामले को जटिल बना दिया है।
समझौते की मुख्य बातें और विवाद की जड़
दोनों देशों के बीच बातचीत के दौरान कुछ बुनियादी मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। इस संभावित समझौते के तहत निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:
- ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को हटाना।
- सीमित तेल निर्यात को फिर से शुरू करना।
- परमाणु प्रतिबद्धताओं को पूरा करना।
- Strait of Hormuz के माध्यम से टैंकरों की आवाजाही को सुगम बनाना।
असली समस्या क्या है? विवाद समझौते की सामग्री पर नहीं, बल्कि उसके कार्यान्वयन के क्रम (Sequencing) पर है। ईरान का तर्क है कि Strait of Hormuz में पूर्ण परिचालन बहाल करने से पहले अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाई जानी चाहिए। दूसरी ओर, वाशिंगटन की शर्त है कि ईरान को पहले अपने परमाणु और शिपिंग संबंधी रियायतें देनी होंगी।
वैश्विक तेल व्यापार पर मंडराता खतरा
Strait of Hormuz का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि दुनिया का लगभग 20% समुद्री तेल व्यापार इसी रास्ते से होता है। पिछले सात महीनों से जारी संघर्ष के कारण क्षेत्रीय निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
वर्तमान स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि:
- सितंबर में खाड़ी से निर्यात लगभग 16 मिलियन बैरल प्रति दिन रहा, जो युद्ध से पहले के स्तर से काफी कम है।
- ऐतिहासिक रूप से यहाँ प्रतिदिन 80 से अधिक जहाज गुजरते थे, लेकिन अक्टूबर की शुरुआत के डेटा के अनुसार यह संख्या काफी कम हो गई है।
- तेल शिपमेंट को अब ओमान के तट पर या महंगे सुरक्षित गलियारों के माध्यम से ले जाया जा रहा है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक प्रयास
क्षेत्र में तनाव अभी भी चरम पर है। UAE में ईरानी मिसाइलों की हलचल और सऊदी अरब के शहरों जैसे रियाद और खामिस मुशाइट पर हुथी हमलों ने स्थिति को गंभीर बना दिया है। इस तनाव के बीच, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और UAE के उपराष्ट्रपति शेख मंसूर बिन जायद ने राष्ट्रीय सुरक्षा और ईरान-हुथी खतरे पर चर्चा करने के लिए मुलाकात की है।
ओमान और कतर इस पूरे मामले में मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। अगले 72 घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। यदि दोनों देश क्रियान्वयन के क्रम पर सहमत हो जाते हैं, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिल सकती है, अन्यथा क्षेत्रीय संघर्ष और गहरा सकता है।