सात शर्तें मानने तक अमेरिका के साथ बातचीत का कोई मतलब नहीं है ईरान संसद का दावा

ईरान के संसदीय प्रवक्ता ने कहा कि सात शर्तों के बिना अमेरिका के साथ बातचीत का कोई मतलब नहीं है।

Gautam Sahu25 October 20262 min read0 viewsWorld
सात शर्तें मानने तक अमेरिका के साथ बातचीत का कोई मतलब नहीं है ईरान संसद का दावा

तेहरान: ईरान की संसद के स्पीकर के प्रवक्ता अब्बास गोज़ार्दी ने साफ किया है कि जब तक अमेरिका ईरान द्वारा तय की गई सात शर्तों को नहीं मानता, तब तक वॉशिंगटन के साथ किसी भी तरह की बातचीत का कोई अर्थ नहीं है। गोज़ार्दी ने कहा कि जब तक अमेरिका ईरान पर अपनी परमाणु क्षमता और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर नियंत्रण छोड़ने का दबाव बनाए रखेगा, तब तक इस्लामी गणराज्य बातचीत में शामिल नहीं होगा।

यह बयान दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच आया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को बताया कि इजरायल और अमेरिका के साथ चल रहे संघर्ष ने क्षेत्रीय वास्तविकताओं को पूरी तरह बदल दिया है, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन को लेकर। अराघची ने बाहरी हस्तक्षेप के बजाय स्थानीय स्तर पर सुरक्षा समाधानों को प्राथमिकता देने की बात कही है।

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रज़ई ने चेतावनी दी है कि अगर युद्ध फिर से शुरू होता है, तो ईरान अमेरिकी संपत्तियों को निशाना बनाने के लिए अपनी नई क्षमताओं का इस्तेमाल करेगा। इसमें एआई (AI) सुविधाएं और केबल्स भी शामिल हैं।

दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को संकेत दिया कि अमेरिका "काम पूरा करने" के लिए जल्द ही, संभवतः रविवार तक, और सैन्य कार्रवाई करने पर विचार कर रहा है। नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर जे क्लेटन से मिली खुफिया जानकारी के बाद अमेरिकी विदेश विभाग ने जॉर्डन, लेबनान, कतर और यूएई में अपने दूतावासों के स्टाफ की संख्या कम कर दी है।

जून में हुए एक अंतरिम समझौते के विफल होने के बावजूद पाकिस्तान, कतर और रूस की मध्यस्थता वाले राजनयिक चैनल अभी भी सक्रिय हैं। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन शांति समझौते की वकालत कर रहे हैं, जबकि संसद स्पीकर मोहम्मद बागर गालिबाफ ने संघर्ष के कारण बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान के चलते घरेलू गैस की खपत में 10 फीसदी कटौती की अपील की है।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin
Share:

Comments

Leave a comment