अमेरिका और ईरान में बढ़ा तनाव, ईरानी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी नागरिकों से की अपील.

Nura Basta4 September 20263 min read29 viewsWorld
अमेरिका और ईरान में बढ़ा तनाव, ईरानी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी नागरिकों से की अपील.

तेहरान और वाशिंगटन के बीच चल रहे सैन्य और कूटनीतिक तनाव के बीच ईरान की तरफ से एक बड़ा बयान सामने आया है। 4 सितंबर 2026 को ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने सीधे तौर पर अमेरिका के नागरिकों से अपील की है। उन्होंने अमेरिकी लोगों से कहा कि वे अपने बच्चों को किसी भी युद्ध के लिए किराए के सैनिक यानी मर्सनेरी न बनने दें। यह बयान ऐसे समय पर आया है जब दोनों देशों के बीच हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और फौजी टकराव की स्थिति बनी हुई है।

नागरिकों को निशाना बनाने का लगा आरोप

ईरानी प्रवक्ता ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अमेरिकी सेना जानबूझकर आम नागरिकों को निशाना बना रही है। उन्होंने सिरिक में एक शादी समारोह पर हुए हमले का विशेष रूप से जिक्र किया। इस हमले में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई थी। ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने इस घटना की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच कराने की मांग की है। हालांकि अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने 4 सितंबर को साफ किया कि इस पूरे मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने ईरानी दावों पर सवाल उठाया और जोर देकर कहा कि अमेरिकी सेना कभी भी जानबूझकर नागरिकों को नुकसान नहीं पहुंचाती है।

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डोनाल्ड ट्रंप का बयान और यूरोपीय संघ का फैसला

इसी दिन अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने हथियारों और गोला-बारूद के स्टॉक को लेकर उठ रही चिंताओं को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने साफ कर दिया कि जरूरत पड़ने पर आगे भी हमले जारी रखने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी ट्रेजरी സെക്രട്ടറി Scott Bessent ने घोषणा की कि यूरोपीय संघ आधिकारिक तौर पर 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' में शामिल हो गया है। यह ईरान के खिलाफ चलाया जा रहा अमेरिका के नेतृत्व वाला एक बड़ा प्रतिबंध अभियान है। यूरोपीय संघ के प्रवक्ता ने कुवैत, जॉर्डन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE के खिलाफ हुई ईरानी सैन्य कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य में सऊदी अरब के कमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों को भी गलत बताया गया है।

सीजफायर वार्ता टूटने के बाद बिगड़े हालात

यह सारा घटनाक्रम 1 सितंबर 2026 को सीजफायर यानी युद्धविराम बातचीत के पूरी तरह विफल होने के बाद शुरू हुआ। इसके ठीक अगले दिन यानी 2 सितंबर 2026 को अमेरिकी सेना ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के ठिकानों को निशाना बनाया। इसके जवाब में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर ड्रोन और मिसाइल से हमले किए गए। ईरान के सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei ने घोषणा की है कि ईरानी सशस्त्र सेनाएं अमेरिका को एक ऐसा सबक सिखाएंगी जिसे वे कभी नहीं भूल पाएंगे। उधर पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी ने नियमों का पालन न करने वाले 11 और जहाजों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है।

आंतरिक प्रदर्शनों पर सख्त रुख और क्षेत्रीय असर

दूसरी ओर घरेलू मोर्चे पर भी सख्ती बरती जा रही है। 31 अगस्त 2026 को ईरान के न्यायपालिका प्रमुख Gholam-Hossein Mohseni Ejei ने चेतावनी दी थी कि देश के भीतर होने वाले किसी भी प्रदर्शन से बहुत सख्ती से निपटा जाएगा। हालांकि 4 सितंबर तक अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का यही कहना था कि मौजूदा हालात को अभी आधिकारिक रूप से युद्ध नहीं कहा जा सकता है। खाड़ी देशों में चल रहे इस तनाव का असर वहां रहने वाले प्रवासियों और आम नागरिकों पर भी साफ देखा जा रहा है। भारत से गल्फ देशों में काम के लिए आने वाले लोगों और उनके परिवारों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं क्योंकि लगातार हो रही इन घटनाओं से पूरे इलाके में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।

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