UAE और जॉर्डन पर ईरान का हमला, अमेरिका के खिलाफ तनातनी बढ़ी, गल्फ देशों में उड़ानों पर बड़ा असर

ईरान और अमेरिका के बीच चल रही सैन्य तनातनी अब बहुत ज्यादा खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है। 1 सितंबर 2026 को ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB ने यह रिपोर्ट दी कि अमेरिका ने ईरान के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित जीरोफ्त एयरपोर्ट (Jiroft Airport) पर हमला कर दिया है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया है और आम लोगों के मन में डर का माहौल बन गया है। गल्फ देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारत आने-जाने वाले यात्रियों के लिए भी यह स्थिति चिंता का विषय बनती जा रही है क्योंकि इसका असर विमान सेवाओं पर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है।
अमेरिका और ईरान के बीच क्यों बढ़ा तनाव
अमेरिकी सेना के केंद्रीय कमान यानी CENTCOM ने यह पुष्टि की है कि उनके बलों ने ईरान के भीतर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकानों पर 1 सितंबर 2026 को दोपहर 12 बजे ET पर हमले शुरू किए। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई हाल ही में हॉर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों और अमेरिकी सैन्य कर्मियों पर आईआरजीसी द्वारा किए गए हमलों के जवाब में की गई है। इस सैन्य कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच की दूरियां और ज्यादा गहरी हो गई हैं और लगातार हमलों का दौर जारी है।
लारक द्वीप पर हमला और गल्फ देशों में जवाबी कार्रवाई
जीरोफ्त की घटना से पहले, अमेरिकी सेना ने 30 अगस्त 2026 को हॉर्मुज जलडमरूमध्य में स्थित लारक द्वीप (Larak Island) पर रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाकर हमला किया था। ईरानी मीडिया के अनुसार, इस हमले में दो लोगों की मौत हो गई थी और दो लोग घायल हो गए थे। ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस अमेरिकी कार्रवाई को खुली सैन्य आक्रामकता बताते हुए अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार जताया। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में अमेरिकी सैन्य बलों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ठिकानों को निशाना बनाया। जॉर्डन की सेना ने जानकारी दी कि उन्होंने हवा में ही आठ मिसाइलों को रोक लिया, जबकि यूएई के अधिकारियों ने पुष्टि की कि उन्होंने अपने जलक्षेत्र के ऊपर एक ईरानी ड्रोन को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया।
ईरान और अमेरिका के बड़े नेताओं के बयान
इन घटनाओं के बाद ईरान के सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ और खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने संयुक्त रूप से चेतावनी जारी करते हुए कहा कि जो भी जगह ईरान पर अमेरिकी हमलों में मदद करेगी, उसे भारी ताकत के साथ निशाना बनाया जाएगा। इसके बावजूद, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन (Masoud Pezeshkian) ने 1 सितंबर को कहा कि अगर वाशिंगटन भी सकारात्मक रुख दिखाए, तो ईरान जून में हुए अंतरिम समझौते की शर्तों पर वापस लौटने के लिए तैयार है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 31 अगस्त को कहा कि भविष्य में और भी हमले करने की जरूरत पड़ सकती है। उन्होंने ईरान को एक विफल राष्ट्र करार दिया जिसकी सेना और अर्थव्यवस्था तबाह हो चुकी है।
विमान सेवाओं और यात्रियों पर असर
इस सैन्य संघर्ष की वजह से क्षेत्रीय विमान सेवाओं पर बहुत बुरा असर पड़ा है। यूरोपीय संघ की विमानन सुरक्षा एजेंसी EASA ने इराक, ईरान और लेबनान के ऊपर उड़ने वाली उड़ानों के लिए अपनी सुरक्षा सलाह को 30 सितंबर 2026 तक के लिए बढ़ा दिया है। अगस्त महीने के दौरान तेहरान के मेहराबाद अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और दूसरे विमानन केंद्रों पर उड़ानों के बंद होने की खबरें लगातार सामने आती रही हैं। गल्फ देशों में काम करने वाले भारतीय प्रवासियों और वहां से यात्रा करने वाले लोगों को इस स्थिति के कारण विमान टिकटों और यात्रा के समय में बदलाव का सामना करना पड़ रहा है।