अमेरिका और इजरायल के संभावित हमलों के बीच ईरान के सुप्रीम लीडर खामनेई ने गालिबफ से मुलाकात की

Gautam Sahu22 October 20262 min read0 viewsWorld
अमेरिका और इजरायल के संभावित हमलों के बीच ईरान के सुप्रीम लीडर खामनेई ने गालिबफ से मुलाकात की

तेहरान (ईरान): पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर नए हमलों की योजना बनाने के दावों के बीच ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैयद मुजतबा होसेनी खामनेई ने बुधवार को संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबफ से मुलाकात की।

मोहम्मद बाकर गालिबफ कतर और पाकिस्तान जैसे मध्यस्थों के जरिए अमेरिकियों के साथ बातचीत का नेतृत्व कर रहे हैं। ईरानी मीडिया के मुताबिक, इस बैठक में अमेरिका और इजरायल के सैन्य हमलों के ताजा घटनाक्रमों की समीक्षा की गई और ईरान की शक्ति के स्रोतों को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया गया।

खामनेई ने राष्ट्रीय एकता और सामाजिक एकजुटता को बनाए रखने में सांसदों की भूमिका को अहम बताया। उन्होंने सशस्त्र बलों और इस्लामिक रिपब्लिक के समर्थन में ईरानियों की भागीदारी की तारीफ करते हुए इसे एक 'निवारक' (deterrent) बताया। इस बैठक की कोई आधिकारिक तस्वीर मीडिया को जारी नहीं की गई है।

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न्यू यॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मुलाकात के बाद दोनों देशों की सेनाओं ने ईरान पर नए हमलों की योजना तैयार की है। इन संभावित हमलों के निशाने पर ईरान का ऊर्जा बुनियादी ढांचा, परमाणु सुविधाएं और मिसाइल व ड्रोन शस्त्रागार हो सकते हैं।

जवाब में ईरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी नए हमले का असर पिछले हमलों की तुलना में कहीं अधिक गंभीर होगा। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रजाई ने कहा कि ईरानी सशस्त्र बलों ने एक अधिक विनाशकारी योजना तैयार की है, जो पुराने नियमों के मुताबिक नहीं होगी।

एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने प्रेस टीवी को बताया कि ईरान अब एक पूर्ण, बहुस्तरीय और व्यापक युद्ध के लिए तैयार है। अधिकारी के मुताबिक, ईरान का यह फैसला अंतिम है और किसी भी सैन्य हमले का जवाब हमलावरों और उनके समर्थकों के क्षेत्रीय हितों को निशाना बनाकर दिया जाएगा।

अमेरिका द्वारा संभावित हमलों और ईरान की युद्ध तैयारियों के बीच पश्चिम एशिया एक बार फिर संकट की कगार पर है। इस नए संघर्ष से वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ सकती है और ईंधन की कीमतों में उछाल आने की संभावना है।

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