अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा भारी तनाव, 15 टैंकर तबाह होने के बाद दागीं मिसाइलें

Praggya Singh sabal9 September 20263 min read37 viewsWorld
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा भारी तनाव, 15 टैंकर तबाह होने के बाद दागीं मिसाइलें

अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसका करारा जवाब देने का संकल्प लिया है। इस बीच, खाड़ी क्षेत्र में दोनों देशों के बीच शुरू हुई इस जंग जैसी स्थिति से व्यापारिक जहाजों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर बड़ा संकट मंडराने लगा है।

अमेरिका ने तबाह किए ईरान के तेल टैंकर

इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब U.S. Central Command (CENTCOM) ने एक रिपोर्ट जारी कर पुष्टि की कि अमेरिकी सेना ने मंगलवार, 8 सितंबर 2026 की शाम को ईरान के पांच तेल टैंकरों को नष्ट कर दिया। अमेरिकी सेना का दावा है कि ईरान ने उनके युद्धपोतों पर मिसाइल हमले की कोशिश की थी, जिसके जवाब में यह कार्रवाई की गई। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, पिछले एक हफ्ते में अमेरिकी सेना ने ईरान के कुल 10 तेल टैंकरों को नष्ट किया है। हालांकि, अमेरिका ने उन दावों को खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि ईरानी हमलों में अमेरिकी नौसेना के जहाजों को नुकसान पहुंचा है।

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ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया और मिसाइल हमले

अमेरिकी कार्रवाई के बाद, बुधवार, 9 सितंबर 2026 को ईरान के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी किया। ईरान ने कहा कि वह अपनी संप्रभुता और हितों की रक्षा के लिए अपनी रक्षा प्रणाली का पूरा इस्तेमाल करेगा। ईरान ने फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों पर अमेरिकी हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सीधा उल्लंघन बताया है। ईरान ने इस मामले में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और संयुक्त राष्ट्र महासचिव से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है।

इसके साथ ही, ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागीं। ईरान का आरोप है कि जॉर्डन अमेरिकी सैन्य अभियानों में मदद कर रहा है। जॉर्डन की सेना ने पुष्टि की है कि उन्होंने बुधवार को 18 ईरानी मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया।

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का बड़ा दावा

इस तनाव के बीच, ईरान की Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) Navy ने दावा किया है कि 9 सितंबर की सुबह उनके बलों ने दो अमेरिकी जहाजों, आठ तेल टैंकरों और दस अन्य जहाजों को निशाना बनाया। ईरान के अनुसार, इन हमलों में अमेरिकी संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है। ईरान ने साफ कहा है कि इस क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों की उपस्थिति और उनकी गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा हैं।

खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों पर असर

फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में बढ़ते इस तनाव का सीधा असर समुद्री व्यापार और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों और अन्य विदेशी नागरिकों के लिए यह स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि वे इस क्षेत्र में रोजगार और व्यापार से जुड़े हैं। यदि यह सैन्य टकराव आगे और बढ़ता है, तो हवाई यात्रा के मार्गों में बदलाव हो सकता है और समुद्री व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं। हालांकि, अभी तक स्थानीय सरकारों ने प्रवासियों के लिए कोई विशेष गाइडलाइन जारी नहीं की है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां पूरी स्थिति पर करीब से नजर रख रही हैं।

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