ईरान का बड़ा बयान: बातचीत से सुलझाएंगे मसले, दुश्मनों के आगे नहीं झुकेगा देश
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने कहा कि ईरान दुश्मनों के सामने आत्मसमर्पण नहीं करेगा और समस्याओं को संवाद के जरिए सुलझाएगा।

तेहरान (ईरान): राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने साफ किया है कि उनकी सरकार बाहरी ताकतों द्वारा पैदा की गई मुश्किलों को संवाद के जरिए हल करने की कोशिश करेगी। राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी जानकारी के मुताबिक, पेज़ेशकियन ने तेहरान में क्षेत्रीय गवर्नरों और मेयरों की एक बैठक में यह बात कही।
पेज़ेशकियन ने बताया कि सुप्रीम लीडर मोजतबा खमेनी ने सरकार को राजनयिक समाधान खोजने के लिए कुछ विशेष अधिकार दिए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि युद्ध से किसी का भला नहीं होता, लेकिन दुश्मन ईरान को आत्मसमर्पण करने पर मजबूर नहीं कर पाएंगे।
राष्ट्रपति ने अमेरिका पर सीमा पार व्यापार में बाधा डालने का आरोप लगाया। उन्होंने संकल्प जताया कि जनता के सहयोग और साथ से दुश्मनों की साजिशों को नाकाम कर दिया जाएगा।
दूसरी ओर, विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने बताया कि क्षेत्रीय दुश्मनी को खत्म करने के लिए कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में बातचीत बहुत तेज हो गई है। तुर्कमेनिस्तान की यात्रा के बाद आईआरएनए समाचार एजेंसी को दिए इंटरव्यू में अराघची ने कहा कि मौजूदा हालात बेहद संवेदनशील और नाजुक हैं।
अराघची के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडलों का दौर जारी है और पक्षों के बीच दर्जनों फोन कॉल और कई संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है। उन्होंने कहा कि तेहरान कूटनीति और रक्षा दोनों के लिए तैयार है। यदि ईरान की शर्तें मान ली जाती हैं, तो होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोल दिया जाएगा।
ईरान ने 22 सितंबर को मध्यस्थों के जरिए अमेरिका को दुश्मनी खत्म करने और जलमार्ग खोलने का सात दिन का प्रस्ताव भेजा था। अराघची ने कहा कि वे तर्क और संवाद के लिए प्रतिबद्ध हैं और सकारात्मक जुड़ाव के लिए तैयार हैं, बशर्ते दूसरी तरफ से भी वैसा ही रवैया अपनाया जाए। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि अगर वाशिंगटन ने सैन्य तनाव बढ़ाया, तो जवाब और भी कड़ा और गंभीर होगा।
इससे पहले 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने तेहरान और अन्य शहरी केंद्रों पर संयुक्त हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली थी। 8 अप्रैल को युद्धरत पक्षों के बीच युद्धविराम हुआ था।
18 जून को ईरान और अमेरिका ने सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत दोनों देशों को परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों को हटाने पर अंतिम सहमति के लिए 17 अगस्त तक बातचीत करनी थी, लेकिन तनाव बढ़ने के कारण कोई पर्याप्त प्रगति नहीं हो सकी।